RANCHI: झारखंड में सामने आए ट्रेजरी घोटाले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने इसे चारा घोटाला पार्ट 2 करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि बोकारो और हजारीबाग में सामने आए इस घोटाले की यदि गहराई से जांच की जाए, तो कई प्रभावशाली और सफेदपोश लोगों का पर्दाफाश हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला जितना साधारण दिखाया जा रहा है, वास्तव में उतना ही संगठित और जटिल है।
25 महीनों में 63 बार अवैध निकासी
उन्होंने बोकारो में गिरफ्तार कौशल पांडे का उदाहरण देते हुए कहा कि वह लंबे समय तक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के करीबी रहे हैं और उन्हें पूर्व डीजीपी द्वारा सम्मानित भी किया गया था। ऐसे में यह मानना मुश्किल है कि एक लेखपाल अकेले 25 महीनों में 63 बार अवैध निकासी कर सकता है। भाजपा ने सवाल उठाया कि डीडीओ की जिम्मेदारी जिला स्तर पर एसपी की होती है, इसलिए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अजय साह ने कहा कि उपेंद्र सिंह के जन्मतिथि में हेरफेर और अन्य तकनीकी छेड़छाड़ यह दर्शाते हैं कि यह एक बड़े रैकेट का हिस्सा है। उपेंद्र सिंह के नाम पर अनु पांडे के खाते में सालों तक अवैध धन हस्तांतरण होना एक बड़े और संगठित रैकेट की ओर संकेत करता है।
जांच से बढ़ सकती है घोटाले की राशि
उन्होंने दावा किया कि अभी तक केवल दो जिलों में ही लगभग 20 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है, जबकि पूरे राज्य में जांच होने पर यह राशि कई गुना बढ़ सकती है। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि हेमंत सरकार के कार्यकाल में ऊर्जा, पर्यटन और पेयजल विभागों में भी बड़े पैमाने पर अवैध निकासी हुई है, जिनका उल्लेख कैग रिपोर्ट में किया गया है। पार्टी ने इस मामले की न्यायिक या सीबीआई जांच की मांग की है जिससे कि सच्चाई सामने आएगी। अजय साह ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कैशियर संतोष कुमार की गिरफ्तारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी भाजपा ने बड़े स्तर की संलिप्तता की आशंका जताई थी, जिसे बाद में ईडी-रांची पुलिस प्रकरण ने सही साबित किया।
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