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Jamshedpur : होर्मुज बंद होने से बिटुमिनस महंगा, झारखंड में सड़क निर्माण कार्य ठप

Jamshedpur : बढ़ोतरी ने ठेकेदारों के लिए पुराने टेंडर रेट पर काम करना मुश्किल बना दिया है। सड़क निर्माण में बिटुमिनस की अहम भूमिका होती है और इसकी लागत बढ़ने से प्रति किलोमीटर निर्माण खर्च भी काफी बढ़ गया है।

by Mujtaba Haider Rizvi
Road construction in Jharkhand affected due to rise in bitumen prices after Hormuz route disruption
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Jamshedpur : पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब झारखंड के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों से आने वाले बिटुमिनस (अलकतरा) की सप्लाई बाधित होने से इसकी कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसके कारण राज्य में सड़क निर्माण की कई परियोजनाएं ठप पड़ गई हैं।

जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले तक 40 से 50 हजार रुपये प्रति टन में मिलने वाला बिटुमिनस अब 61 हजार से लेकर एक लाख रुपये प्रति टन तक पहुंच गया है। इस भारी बढ़ोतरी ने ठेकेदारों के लिए पुराने टेंडर रेट पर काम करना मुश्किल बना दिया है। सड़क निर्माण में बिटुमिनस की अहम भूमिका होती है और इसकी लागत बढ़ने से प्रति किलोमीटर निर्माण खर्च भी काफी बढ़ गया है।

पूर्वी सिंहभूम में काम प्रभावित

जमशेदपुर और पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थिति और गंभीर हो गई है। पथ प्रमंडल के अधिकारियों के मुताबिक, मरम्मत कार्य तो किसी तरह पूरे कर लिए गए हैं, लेकिन नई सड़कों का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। हाल ही में टेंडर हासिल करने वाले कई ठेकेदारों ने मौजूदा दरों पर काम करने से इनकार कर दिया है और विभाग से समय की मांग की है।

एनएच निर्माण भी बाधित

इस संकट का असर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर भी पड़ रहा है। एनएचएआई के अधिकारियों ने माना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव के कारण लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने से जहाजों का किराया और बीमा महंगा हो गया है, जिससे लागत और बढ़ गई है।

भारत में बिटुमिनस की मांग और आपूर्ति के बीच पहले से ही बड़ा अंतर है। देश में सालाना करीब 90 लाख टन की जरूरत होती है, जबकि उत्पादन लगभग 50 लाख टन ही हो पाता है। बाकी जरूरतों के लिए भारत इराक, यूएई, ईरान और ओमान जैसे देशों पर निर्भर है। झारखंड में बड़े स्टोरेज की कमी के कारण यह समस्या और गहरा जाती है।

अन्य विकल्पों पर चल रहा विचार

इस स्थिति को देखते हुए अब वैकल्पिक उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। रूस और पश्चिम अफ्रीका से आयात की संभावनाएं तलाशने के साथ-साथ बायो-बिटुमिनस और प्लास्टिक मिश्रित सड़कों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक झारखंड में सड़क निर्माण की रफ्तार धीमी रहने की संभावना है। ठेकेदार फिलहाल इंतजार की स्थिति में हैं, वहीं आम लोगों को नई सड़कों के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।

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