RANCHI: झारखंड के चर्चित हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को बड़ा झटका लगा है। मंगलवार को झारखंड उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि पिछले गुरुवार को विनय चौबे और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की ओर से पक्ष रखे जाने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। लंबी सुनवाई के बाद मंगलवार को अदालत ने अपना निर्णय सुनाया।
यह मामला कांड संख्या 11/2025 से जुड़ा है। आरोप है कि विनय चौबे ने हजारीबाग के उपायुक्त रहते हुए वन विभाग के पांच बड़े प्लॉटों की अवैध जमाबंदी कराई। ये जमीनें ‘गैरमजरूआ खास जंगल झाड़ी’ श्रेणी में आती थीं, जिनका उपयोग केंद्र सरकार की अनुमति के बिना किसी अन्य कार्य के लिए नहीं किया जा सकता। जांच एजेंसियों के अनुसार, उन्होंने खरीदार विनय सिंह और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी वन भूमि का मालिकाना हक बदलने की साजिश रची। इस मामले की गूंज वर्ष 2013 में ही सामने आ गई थी, जब विवादित जमाबंदियों को रद्द कर दिया गया था।बाद में एसीबी की प्रारंभिक जांच में भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए गए। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद 25 सितंबर 2025 को इस मामले में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।अदालत ने वन संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन और सरकारी पद के दुरुपयोग को गंभीर मानते हुए फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया।

