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Jharkhand Politics : झारखंड कांग्रेस में पीसीसी गठन के बाद बवाल, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का प्रदेश नेतृत्व पर हमला

राधाकृष्ण किशोर के पुत्र प्रशांत किशोर, जिन्हें हाल ही में प्रदेश सचिव बनाया गया था, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस पर सतीश पॉल मुंजनी ने कहा कि पार्टी ने सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया है और जिन्हें जिम्मेदारी मिली है, उन्हें उस पर काम करना चाहिए था।

by Mujtaba Haider Rizvi
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Ranchi : झारखंड की नई प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) की घोषणा होते ही पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। राज्य के वित्त मंत्री और छतरपुर से विधायक राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश नेतृत्व पर तीखा निशाना साधते हुए कई सवाल खड़े किए हैं।लंबे इंतजार के बाद घोषित इस नई कमेटी पर प्रतिक्रिया देते हुए किशोर ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने प्रदेश प्रभारी के. राजू को संबोधित एक पत्र फेसबुक पर पोस्ट किया, जिसमें पार्टी के फैसलों पर गंभीर आपत्ति जताई गई है।

उन्होंने लिखा कि कांग्रेस को हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों से सीख लेने की जरूरत है।राधाकृष्ण किशोर ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई और रमा खलखो को पद देकर सम्मानित किए जाने की तुलना करते हुए इसे ‘एक आंख में काजल, एक आंख में सुरमा’ वाली स्थिति बताया। उन्होंने 314 सदस्यों वाली इस ‘जंबो’ पीसीसी की उपयोगिता पर भी सवाल उठाए और कहा कि संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेश नेतृत्व पर ठोस निर्णय लेने की जरूरत है।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष और अनुशासन समिति के सदस्य अभिलाष साहू ने कहा कि राधाकृष्ण किशोर के पत्र की जानकारी प्रदेश प्रभारी तक पहुंचा दी गई है।वहीं, कांग्रेस नेता सतीश पॉल मुंजनी ने इस विवाद पर कहा कि हर नेता की अपनी महत्वाकांक्षा होती है, लेकिन अगर किसी को शिकायत है तो उसे पार्टी मंच पर उठाना चाहिए, न कि सार्वजनिक रूप से।इस विवाद के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है।

राधाकृष्ण किशोर के पुत्र प्रशांत किशोर, जिन्हें हाल ही में प्रदेश सचिव बनाया गया था, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस पर सतीश पॉल मुंजनी ने कहा कि पार्टी ने सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया है और जिन्हें जिम्मेदारी मिली है, उन्हें उस पर काम करना चाहिए था।अनुशासनहीनता के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पर अंतिम फैसला प्रदेश प्रभारी और शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

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