रांची। झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि राज्य में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी प्रमंडलों में दिन-रात संचालित होने वाले कंट्रोल रूम के गठन का निर्देश भी दिया। लगातार बिजली आपूर्ति में कटौती से लोग परेशान हैं।
इस गंभीर समस्या को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बुधवार को ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की गई। बैठक में बिजली उत्पादन, संचरण, ऊर्जा विकास और वितरण निगम के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। राज्य में लगातार हो रही बिजली कटौती और चरमराई व्यवस्था को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया। लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के भी संकेत दिए हैं।
बिजली आपूर्ति में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं
मुख्य सचिव ने दो टूक कहा कि बिजली आपूर्ति में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अब जवाबदेही तय होगी। उन्होंने कहा कि फील्ड में तैनात महाप्रबंधक अपने आपको केवल कार्यालय तक सीमित न रखें। वे फिल्ड में जाएं और जमीनी स्तर पर निगरानी करें। जाकर देखें कि कहां क्या परेशानी आ रही है।
उन्होंने संचरण निगम के एमडी केके वर्मा को ट्रांसमिशन से जुड़ी बाधाओं पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य में लगभग 95 प्रतिशत ट्रांसफॉर्मर कार्यरत हैं। इस पर मुख्य सचिव ने पूछा कि संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद बिजली बाधित क्यों रहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने से लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने पर संबंधित मुख्य अभियंताओं पर कड़ी कार्रवाई होगी।
अस्पतालों को दो अलग-अलग बिजली स्रोतों से जोड़ने का निर्णय
बैठक के दौरान राज्य के सभी सदर और अनुमंडल अस्पतालों को दो अलग-अलग बिजली स्रोतों से जोड़ने का निर्णय लिया गया, ताकि आपूर्ति बाधित न हो। साथ ही जरेडा को सभी सरकारी अस्पतालों में सोलर पैनल लगाने का दायित्व सौंपा गया। शहरी क्षेत्रों में सीमेंट पोल की जगह ट्यूबलर और रेल पोल लगाने का भी फैसला लिया गया है। बैठक में ऊर्जा सचिव के श्रीनिवासन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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