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Ghatshila News: राखा कॉपर माइंस के पानी से नदी-नाले प्रदूषित, प्रबंधन ने कहा- जांच के बाद छोड़ा जाता है पानी

ग्राम प्रधान महतो ने एचसीएल कंपनी पर विषाक्त पानी के कारण ग्रामीण लोगों को चर्म रोग एवं जलीय जीव नष्ट होने का लगाया आरोप। जहरीला पानी केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन ही नहीं बल्कि श्रमिकों के स्वस्थ्य और जल सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा।

by Rajesh Choubey
Rakha Copper Mines Water Pollution
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घाटशिला : हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड राखा कॉपर माइंस के दूषित पानी को आसपास के नदी और नाला में डाले जाने को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। इस मामले को लेकर रुवाम गांव के ग्राम प्रधान मनोरंजन महतो ने एचसीएल प्रबंधन को पत्र लिखकर कड़ी नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि दूषित ओर विषाक्त पानी के नदी नाले में जाने के कारण ही जलीय जीव का नुकसान हो रहा है लोगों को चर्म रोग हो रही है पानी पीने लायक नहीं रहा इससे लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।

नाला नदी पूरी तरह से प्रदूषित और जहरीला

रुवाम के ग्रामीण शिव शंकर सबर का कहना है कि एचसीएल के दूषित पानी से यहां पर नाला नदी पूरी तरह से प्रदूषित और जहरीला हो गया। इसमें नहाने से पूरे शरीर में खुजली हो गई 2 महीना तक इलाज करने के बाद ठीक हुआ, पूरे शरीर में अभी भी दाग है। गांव के ही सूरज महतो का कहना है कि पानी से नहाने कारण पूरे शरीर में चर्म रोग हो गया काफी इलाज करने के बाद ठीक हुआ है अब इस पानी में हम लोग नहाना छोड़ दिए हैं।

गांव के सुमित्रा सबर का कहना है कि पानी दूषित हो जाने से ग्रामीणों को परेशानी हो रही है जीव जंतु को भी पानी के लिए तरसना पड़ रहा है पूरे शरीर में खुजली हो गई। एचसीएल प्रबंधन को इसकी शिकायत की गई लेकिन किसी प्रकार का मदद नहीं की जा रही है।

पानी में नहाने के कारण बच्चे भी हो रहे चर्म रोग के शिकार

गांव की कई बच्चे भी चर्म रोग के शिकार हो गए इसी पानी में नहाने के कारण अविनाश कुमार महतो का चर्म रोग हो गया जिसके कारण वह 1 महीने तक स्कूल नहीं जा पाया। इसी प्रकार अभिषेक कर्मकार, मनीषा महतो को भी चर्म रोग हो गया उसका इलाज घाटशिला के अस्पताल में कराया गया।

जीव जंतु भी परेशान

गांव के ग्राम प्रधान मनोरंजन महतो का कहना है कि पहले यह पानी लोग उपयोग में लाते थे लेकिन एच सी एल प्रबंधन से निकले हुए विषाक्त पानी के कारण पानी पूरी तरह जहरीला हो चुका है। जानवरों को भी नहाने में काफी दिक्कत हो रही है। जीव-जंतु भी पानी का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

एच सी एल कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप

ग्राम प्रधान मनोरंजन महतो ने एच सी एल कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी को बार-बार लिखित आवेदन देने के बावजूद एवं मौखिक रूप से से मना करने पर की माइन्स का जहरीला पानी प्राकृतिक जल स्त्रोत में डाला रहा है। जिसके कारण कई ग्रामीण लोगों को चर्म रोग एवं जलीय जीव नष्ट हो रहे है। यह केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन ही नहीं बल्कि श्रमिकों के स्वस्थ्य और जल सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। अगर यही स्थिति रही तो यह और भी भयावह हो सकता है।

नदी नाला में विषाक्त पानी छोड़ना तुरंत बंद करें

ग्राम प्रधान ने कहा कि नदी नाला में विषाक्त पानी छोड़ना तुरंत बंद किया जाय और कम्पनी अपने स्तर से जलाश्य का निर्माण करा कर उसी में माइन्स का दूषित पानी जमा करें।

Rakha Copper Mines Water Pollution

ग्रामीणों में भारी नाराजगी

इस मामले को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि एचसीएल कंपनी ग्रामीणों के जीवन से खिलवाड़ कर रही है साथ ही साथ ग्रामीणों का कहना है कि एचसीएल कंपनी यहां संचालन करे ना कि ठेका में माइंस को खनन करने का काम दे। ग्राम प्रधान ने कहा कि आसपास में काफी पेड़ भी काटे जा रहे है जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है ग्राम सभा से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है पहले ग्राम सभा से अनुमति ले उसके बाद ही किसी प्रकार का काम यहां प्रारंभ किया जाए।

ग्राम प्रधान ने पत्र लिखकर की कार्रवाई की मांग

उन्होंने बताया कि जीयाडा द्वारा रुवाम मौज में 90 एकड़ जमीन एचसीएल कंपनी के द्वारा ली गई है लेकिन वह जमीन पूरी तरह से विवादित जमीन है पहले ग्राम सभा से उसे विवाद को खत्म करने के बाद ही वहां किसी प्रकार का निर्माण कार्य कराया जाए नहीं तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करेंगे। ग्राम प्रधान ने इस मामले को लेकर घाटशिला के अनुमंडल पदाधिकारी मुसाबनी सीओ एवं साउथवेस्ट माइनिंग लिमिटेड को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग किया है।

प्रबंधन के प्रोजेक्ट हेड ने आरोपों को नकारा

हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की राखा खदान का संचालन कर रही साउथ वेस्ट माइनिंग लिमिटेड प्रबंधन के प्रोजेक्ट हेड मलय दरिपा ने बताया कि राखा खदान से निकलने वाले पानी को सीधे बाहर नहीं छोड़ा जाता, बल्कि इसे चार अलग अलग चरणों में ट्रीटमेंट प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसके बाद ही निर्धारित मानकों के अनुसार इसे नाले के माध्यम से नदी में प्रवाहित किया जाता है। चर्म रोग होने की केवल एक लोग की ही शिकायत आयी है प्रदूषण बोर्ड के द्वारा जांच पड़ताल की जा रही है, लेकिन पानी छोड़ने की सभी प्रक्रिया सही है। उन्होंने जानकारी दी कि खदान से पानी निकासी के लिए सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी से विधिवत अनुमति प्राप्त है और पर्यावरण संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया जा रहा है।

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