Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले के खूंटपानी प्रखंड में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल देखने को मिल रही है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के तहत गठित संकुल संगठन की दीदियों ने पलाश नोटबुक निर्माण केंद्र की स्थापना की है। 7 संकुल संगठनों की सदस्य मिलकर इस केंद्र का संचालन कर रही हैं। दीदियों ने संकुल संगठन से 10 लाख रुपए का ऋण लेकर नोटबुक निर्माण व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में इनके पास मशीन संचालन या इलेक्ट्रॉनिक से जुड़ा कोई अनुभव नहीं था, जिससे उत्पादन प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण थी।
रांची से आए विशेषज्ञों ने दी ट्रेनिंग
इसे देखते हुए रांची से आए विशेषज्ञों ने तीन चरणों में इन्हें प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में मशीन संचालन, उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने और विपणन की रणनीतियों की जानकारी दी गई। यह प्रशिक्षण दीदियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। लगन और समर्पण से सभी बाधाओं को पार कर दीदियों ने खुद को कुशल उद्यमी के रूप में स्थापित किया। वर्तमान में केंद्र में प्रतिदिन लगभग 1000 नोटबुक का उत्पादन हो रहा है।
उपायुक्त ने की सराहना
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने बताया कि खूंटपानी भ्रमण के दौरान प्रखंड कार्यालय में स्थित पलाश नोटबुक निर्माण केंद्र की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि यह केंद्र महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण है। उपायुक्त ने कहा कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं और समाज की प्रगति में भी योगदान दे सकती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि कार्यालयों, घरों और बच्चों के लिए आवश्यक नोटबुक यहां से खरीदें। ये नोटबुक बेहतर गुणवत्ता के हैं और कम कीमत में उपलब्ध हैं।

कम मार्जिन पर बेचकर बनाई पहचान
पलाश नोटबुक निर्माण से जुड़ी संकुल संगठन की सदस्य रोमा गोडसरे ने बताया कि शुरुआती दौर में बाजार में पहचान बनाने के लिए उत्पादों को कम मार्जिन पर बेचा गया। अब ब्रांड की पहचान मजबूत होने के साथ मूल्य निर्धारण को संतुलित कर गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्राथमिक बिक्री स्कूलों और खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से होती है, जिससे मांग स्थिर बनी रहती है।
सरस मेले में भी किया प्रतिनिधित्व
डीपीएम जेएसएलपीएस अशियानी मारकी ने बताया कि पलाश नोटबुक निर्माण केंद्र ने खूंटपानी के साथ राज्य स्तरीय सरस मेले में भी जिले का प्रतिनिधित्व किया। वहां इनके कार्यों को काफी सराहना मिली। अब इनके उत्पाद विभिन्न स्थानीय मेलों में भी प्रदर्शित हो रहे हैं, जिससे बाजार में उपस्थिति मजबूत हुई है।

चूल्हा चौका से उद्यम तक का सफर
पलाश नोटबुक निर्माण में संलग्न दीदियां चूल्हा चौका और घर गृहस्थी से आगे निकलकर कुशल उद्यमी बन चुकी हैं। आज सभी दीदी घर के खर्चे में सहयोग करते हुए परिवार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इससे इनके जीवन में आर्थिक सुधार के साथ निजी और सामाजिक बदलाव भी आए हैं। यह कहानी उन महिलाओं की दृढ़ता और संकल्प की है, जिन्होंने आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम उठाया और आज मेहनत का सफल परिणाम पा रही हैं।

