रांची: झारखंड सरकार ने भूमि हस्तांतरण को प्रोत्साहित करने और विकास परियोजनाओं की प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी दो अलग-अलग अधिसूचनाओं के तहत कुछ विशेष मामलों में स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क में पूर्ण छूट देने की घोषणा की गई है।
जारी अधिसूचना के अनुसार यदि कोई भू-स्वामी अपनी निजी भूमि झारखंड सरकार, उसके सार्वजनिक उपक्रमों अथवा जनहित से जुड़े सरकारी प्रयोजनों के लिए दानपत्र के माध्यम से हस्तांतरित करता है, तो ऐसे दस्तावेजों पर कोई स्टांप शुल्क या निबंधन शुल्क नहीं लगेगा। यह छूट नागरिक सुविधाओं के विस्तार, शहरी एवं ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, पार्क, पुस्तकालय तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाओं के लिए भूमि दान पर लागू होगी।
इसके अलावा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति के तहत झारखंड सरकार द्वारा चिन्हित और अधिसूचित भूमि से संबंधित दस्तावेजों को भी स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क से पूर्णतः मुक्त किया गया है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से विकास योजनाओं और पुनर्वास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी तथा भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अधिक सरल और सुगम बनेगी। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था 1 जून 2026 से प्रभावी होगी। इस संबंध में प्रस्ताव को 27 मई 2026 को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई थी। सरकार के इस फैसले से सार्वजनिक हित की परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने वाले भू-स्वामियों को आर्थिक राहत मिलेगी, वहीं पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन से जुड़ी योजनाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है।

