Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम के सबसे बड़े सदर अस्पताल में उपायुक्त के प्रयास के बाद महीने में दो बार हो रहे रक्तदान के बावजूद थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों को समय पर रक्त नहीं मिल पा रहा है। मंझारी से आए गरीब परिवारों ने आरोप लगाया कि रक्त नहीं मिलने से इलाज में परेशानी हो रही है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन से सहयोग नहीं मिलने के कारण उन्हें भटकना पड़ रहा है।
इस मामले पर सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती है। रक्त की आवश्यकता की जानकारी कम से कम एक दिन पहले देनी होती है, ताकि इंतजाम किया जा सके।
सिविल सर्जन ने बताया कि पश्चिमी सिंहभूम जिले में 67 थैलेसीमिया पीड़ित हैं। इन्हें महीने में दो बार रक्त दिया जाता है। इसके अलावा सदर अस्पताल के अन्य मरीज और एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को भी रक्त देना पड़ता है। जिले में रोज 35 से 40 यूनिट रक्त की जरूरत है, लेकिन अभी 20 से 25 यूनिट ही मिल रहा है।
जमशेदपुर-रांची से मंगाना पड़ रहा रक्त
सिविल सर्जन ने कहा कि जिले में रक्त का संग्रहण हो रहा है, लेकिन ब्लड बैंक नहीं होने के बाद कारण यहां से जमशेदपुर स्थित एमजीएम भेज दिया जाता है। वहां से रांची रिम्स भेजा जाता है। इसी कारण रक्त आने में देरी हो रही है। वहां से अप्रूवल होने के बाद चाईबासा रक्त आता है।
ब्लड सेंटर का 90 प्रतिशत काम पूरा
चाईबासा ब्लड बैंक के लाइसेंस नवीकरण पर सिविल सर्जन ने बताया कि जिले में ब्लड सेंटर से जुड़ा लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष प्रक्रिया भी जल्द पूरी कर ली जाएगी। ब्लड सेंटर पूरी तरह संचालित होने के बाद मरीजों और परिजनों को रक्त के लिए जमशेदपुर, रांची या अन्य शहरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर ही बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

