Jamshedpur : क्या आपने कभी ऐसे पेड़ के बारे में सुना है जो दो हजार वर्षों से भी अधिक समय तक जीवित रह सकता हो और अपने विशाल तने में हजारों लीटर पानी संचित कर सकता हो? अफ्रीका में पाए जाने वाले बाओबाब पेड़ की यही खासियत उसे दुनिया के सबसे अनोखे वृक्षों में शामिल करती है। इसी वजह से इसे ‘ट्री ऑफ लाइफ’ यानी जीवन का वृक्ष भी कहा जाता है।
हैरानी की बात यह है कि इस अद्भुत पेड़ को देखने के लिए अफ्रीका जाने की जरूरत नहीं है। झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में भी बाओबाब के कई पेड़ मौजूद हैं, जो शहर की प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा बने हुए हैं।
गौरतलब है कि जमशेदपुर में वर्तमान में कुल 13 बाओबाब के पेड़ हैं। इनमें सबसे पुराना और विशाल पेड़ साकची क्षेत्र में स्थित है। इसके अलावा न्यू अरुण रोड पर दो युवा बाओबाब वृक्ष मौजूद हैं। वहीं इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से टाटा स्टील यूआईएसएल द्वारा जुबली पार्क में 10 नए बाओबाब पौधे लगाए गए हैं।
साकची थाना के समीप स्थित बाओबाब पेड़ अपनी विशालता के कारण लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित करता है। इसकी परिधि करीब 9.5 मीटर है, जबकि तने के भीतर का खोखला हिस्सा लगभग 3 मीटर चौड़ा है। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके अंदर एक छोटी कार समा सकती है या फिर कोई व्यक्ति आराम से अपना बिस्तर लगाकर विश्राम कर सकता है।
बाओबाब की पत्तियां अत्यधिक पौष्टिक और खाने योग्य होती हैं। इसकी मजबूत छाल का उपयोग रस्सियां बनाने में किया जाता है, जबकि इसका फल प्राकृतिक रूप से सूखकर विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर पौष्टिक पाउडर में बदल जाता है।
शहर के बीचों-बीच खड़ा यह अनोखा वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि इतिहास का जीवंत साक्षी है। अगली बार जब आप साकची से गुजरें, तो कुछ पल रुककर इस प्राकृतिक अजूबे को जरूर देखें, क्योंकि यह जमशेदपुर की उन विरासतों में शामिल है जो आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी कहानी सुनाती रहेंगी।
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