
पलामू : कहते हैं कि अगर हौसला सच्चा हो, तो बंद किस्मत के दरवाजे भी खुल जाते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है पलामू के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत अवसाने गांव में रहने वाली सातवीं क्लास की छात्रा ललिता कुमारी ने। ललिता के माता-पिता दोनों दिव्यांग हैं और चल-फिर पाने में असमर्थ हैं। घर की जिम्मेदारी और लाचारी को देखकर इस छोटी सी बच्ची ने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पलामू डीसी से मदद की गुहार लगाई। वीडियो वायरल होते ही पलामू डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत खुद शनिवार को उस बच्ची के टूटे बिखरे जर्जर घर पर पहुंच गए।
ऐसी थी घर की हालत
ललिता का परिवार जिस हाल में जी रहा था, उसे देखकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं। पूरा परिवार एक ऐसी कच्ची, जर्जर झोपड़ी में रहने को मजबूर था जो कभी भी गिर सकती थी। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था।
छह भाई-बहनों और दिव्यांग माता-पिता वाले इस बड़े परिवार के पास खाने के लिए दो वक्त की रोटी तक नहीं थी। राशन का संकट इस कदर था कि परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच चुका था। पिता चिंटू चौधरी और मां, दोनों ही शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं, जिस वजह से वे मजदूरी करके घर चलाने की स्थिति में भी नहीं थे।
डीसी ने तुरंत दिया सरकारी योजनाओं का सहारा
मासूम ललिता की इस हिम्मत को देखकर डीसी भावुक हो गए। उन्होंने तुरंत मौके पर ही परिवार को राशन की किट सौंपी ताकि घर में चूल्हा जल सके। इसके साथ ही, सिर छुपाने के लिए तुरंत ‘बाबा साहब भीमराव अंबेडकर आवास योजना’ के तहत पक्का मकान देने का आदेश जारी किया।
डीसी ने ललिता की पीठ थपथपाते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में उसने अपने परिवार के लिए जो साहस दिखाया है, वह काबिले तारीफ है। प्रशासन ने सभी छह बच्चों को पढ़ाई की सामग्री दी, वहीं मौके पर ही ललिता की एक बहन का स्कूल में दाखिला भी कराया गया। प्रशासन ने भरोसा दिया है कि इस परिवार को कभी भी लाचार नहीं रहने दिया जाएगा।

