
रांची । धुर्वा क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में इस साल होने वाली रथ यात्रा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए एक बेहद खूबसूरत और बड़ा रथ तैयार किया जा रहा है। इस रथ को खास रूप देने के लिए ओडिशा से कारीगर बुलाए गए हैं, जो रात-दिन काम पूरा करने में लगे हैं।
29 जून से शुरू होंगे नियम-कानून
धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत 29 जून को देव स्नान के साथ होगी। इस दिन परंपरा के मुताबिक भगवान को खास स्नान कराया जाता है। इसके बाद अगले 15 दिनों तक भगवान एकांत में चले जाएंगे, जिसे अनासर काल कहा जाता है। मान्यता है कि स्नान के बाद भगवान बीमार हो जाते हैं, इसलिए इस दौरान भक्त उनके दर्शन नहीं कर सकेंगे।
इसके बाद 15 जुलाई को नेत्रोत्सव का त्योहार मनेगा। ठीक उसके अगले दिन 16 जुलाई को मुख्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ रथ पर बैठकर मौसीबाड़ी के लिए रवाना होंगे। इसी के साथ रांची का प्रसिद्ध 10 दिनों का रथ मेला भी शुरू हो जाएगा।
टेंडर प्रक्रिया की तैयारी
मेले के आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। 29 जून से मेले की दुकानों और व्यवस्था के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो रही है। इस बार टेंडर की बेस प्राइस 1 करोड़ 5 लाख रुपये तय की गई है। पिछले वर्षों की बात करें तो 2023 में यह टेंडर 75 लाख रुपये में छूटा था, जबकि 2024 में यह रकम बढ़कर 1.92 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। साल 2025 में आपसी सहमति से 51 लाख रुपये में टेंडर फाइनल हुआ था।
पड़ोसी राज्यों से आते हैं लोग
धुर्वा का यह मेला झारखंड के सबसे बड़े आयोजनों में से एक है। इसमें झारखंड के अलावा बंगाल और ओडिशा से भी बड़े-बड़े कारोबारी दुकानें लगाने आते हैं। मेले में खास मिठाइयां, हस्तशिल्प, पारंपरिक तीर-धनुष, मांदर, खेती के सामान और बच्चों के झूले मुख्य आकर्षण होते हैं।
मंदिर का इतिहास
यह ऐतिहासिक मंदिर करीब 250 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना है। इसका निर्माण साल 1691 में नागवंशी राजाओं द्वारा कराया गया था, जिसका 1991 में दोबारा मरम्मत और जीर्णोद्धार किया गया। पुरी की तरह ही रांची की रथ यात्रा भी देश भर में अपनी खास पहचान रखती है।
मेले को सुरक्षित और सुंदर बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। सुरक्षा, पीने के पानी, साफ-सफाई और ट्रैफिक के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी होगी ताकि श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न हो।

