
Ranchi : रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) पोस्ट हटिया ने ऑपरेशन “एएचटी” के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए चार नाबालिग बालकों को कथित मानव तस्करी का शिकार होने से बचाया है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) थाना, कोतवाली के हवाले कर दिया गया है। आरपीएफ की टीम ने 7 जुलाई को हटिया रेलवे स्टेशन पर जांच अभियान के दौरान प्लेटफॉर्म संख्या-1 के एस्केलेटर के पास एक युवक को चार नाबालिग बच्चों के साथ संदिग्ध स्थिति में बैठे देखा। पूछताछ में युवक संतोषजनक जवाब नहीं दे सका, जिसके बाद सभी को आरपीएफ पोस्ट लाकर पूछताछ की गई।
पूछताछ में बच्चों ने बताया कि वे बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं और आरोपी उन्हें नौकरी तथा अच्छे वेतन का झांसा देकर बेंगलुरु ले जा रहा था। आरोपी की पहचान नवादा निवासी 25 वर्षीय आशीष यादव के रूप में हुई। पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसे एक अन्य व्यक्ति ने बच्चों को बेंगलुरु पहुंचाने की जिम्मेदारी दी थी। इसके लिए उसे टिकट और यात्रा खर्च के लिए पैसे दिए गए थे तथा बच्चों को पहुंचाने पर चार हजार रुपये कमीशन मिलने वाला था। उसने यह भी कबूल किया कि करीब एक माह पहले भी वह दो नाबालिग बच्चों को इसी तरह बेंगलुरु ले जा चुका है।
तलाशी में आरोपी के पास से एक की-पैड मोबाइल फोन, हटिया से एसएमवीटी बेंगलुरु तक के पांच सामान्य श्रेणी के रेलवे टिकट और 660 रुपये नकद बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में मामला बाल श्रम और आर्थिक लाभ के उद्देश्य से नाबालिगों की तस्करी का पाया गया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2), 143(5), 3(5) तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 और 81 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, चारों नाबालिगों को संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
इस कार्रवाई में उप निरीक्षक सोहन लाल, उप निरीक्षक रीता कुमारी, सहायक उप निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह तथा आरपीएफ जवान अमित सिंह और छोटी बाई मीणा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
ऑपरेशन ‘नन्हे फरिश्ते’ के तहत लोहरदगा स्टेशन से नाबालिग बालिका सुरक्षित रेस्क्यू

लोहरदगा : रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) पोस्ट लोहरदगा ने ऑपरेशन “नन्हे फरिश्ते” के तहत एक 17 वर्षीय नाबालिग बालिका को सुरक्षित रेस्क्यू कर चाइल्डलाइन के सुपुर्द किया है। आरपीएफ की टीम ने 7 जुलाई की रात लोहरदगा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या-1 स्थित मुख्य प्रवेश द्वार के पास एक नाबालिग बालिका को अकेले और घबराई हुई अवस्था में देखा। पूछताछ के दौरान वह पहले कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकी, लेकिन काउंसलिंग के बाद उसने अपनी पहचान गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र की रहने वाली सुनीता कुमारी के रूप में बताई।
बालिका ने बताया कि माता-पिता की डांट-फटकार और स्वयं को उपेक्षित महसूस करने के कारण वह घर छोड़कर रेलवे स्टेशन पहुंच गई थी।आरपीएफ ने तत्काल मामले की जानकारी चाइल्डलाइन लोहरदगा को दी। रात में महिला स्टाफ उपलब्ध नहीं होने के कारण अगले दिन आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर बालिका को सुरक्षित रूप से चाइल्डलाइन के सुपुर्द कर दिया गया, ताकि उसके संरक्षण, काउंसलिंग और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
इस सफल अभियान में सहायक उप निरीक्षक अभिषेक कुमार तथा आरपीएफ स्टाफ मुन्ना महतो और मंजू कुमारी की सक्रिय एवं संवेदनशील भूमिका रही।

