
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने झामुमो नेता निर्मल महतो हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे नरेंद्र सिंह दीक्षित उर्फ नरेंद्र पंडित की समय-पूर्व रिहाई (प्रीमैच्योर रिलीज) की अर्जी खारिज करने संबंधी राज्य सजा समीक्षा बोर्ड के निर्णय को रद्द कर दिया है। जस्टिस आर. मुखोपाध्याय की अदालत ने बोर्ड को राज्य सरकार की 26 मई 2011 की नीति के अनुरूप मामले पर नए सिरे से विचार कर तीन माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि समय-पूर्व रिहाई पर फैसला करते समय केवल अपराध की प्रकृति नहीं, बल्कि दोषी का जेल में आचरण, पुन: अपराध की संभावना, सामाजिक परिस्थितियां और समाज पर प्रभाव जैसे सभी निर्धारित मानकों पर विचार करना आवश्यक है। कोर्ट ने पाया कि बोर्ड ने प्रोबेशन अधिकारी की अनुकूल रिपोर्ट और नीति के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी करते हुए केवल हत्या के राजनीतिक पहलू को आधार बनाकर अर्जी खारिज कर दी।
नरेंद्र सिंह दीक्षित लगभग 23 वर्ष की वास्तविक सजा और रिमिशन सहित करीब 29 वर्ष की सजा पूरी कर चुका है। हाईकोर्ट ने बोर्ड के 28 मार्च 2025 के आदेश को निरस्त कर मामला पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया।
पलामू डीएसई को 5 अगस्त को सशरीर तलब
झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षक नंदू राम की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पलामू के जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) को 5 अगस्त को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा की आदेश का पूर्ण पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। कोर्ट ने पहले पुनर्बहाली के साथ सेवा से बाहर रहने की अवधि के सभी वेतन व सेवा लाभ देने का आदेश दिया था। प्रार्थी ने बताया कि पुनर्बहाली तो कर दी गई, लेकिन बकाया वेतन और अन्य लाभ अब तक नहीं दिए गए, जबकि राज्य सरकार की अपील भी पहले ही खारिज हो चुकी है।
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