
धनबाद: कोल इंडिया के गैर-अधिकारी वर्ग के लिए अच्छी खबर है। हाल ही में जेबीसीसीआई-11 की मानकीकरण समिति की सातवीं बैठक के फैसले सार्वजनिक किए गए हैं, जिसमें कर्मचारियों की जेब से लेकर उनकी सहूलियतों तक को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।
बैठक के मुख्य फैसलों को समझने के लिए आइए इस पर एक नजर डालते हैं:
सेटलिंग अलाउंस में भारी बढ़ोतरी
कंपनी में नए भर्ती होने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले ‘सेटलिंग अलाउंस’ (रहने-खाने व बसने का भत्ता) को सीधे 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने पर सहमति बनी है। जैसे ही कोल इंडिया बोर्ड से इसे अंतिम मंजूरी मिलेगी, यह नियम लागू हो जाएगा।
अनुकंपा नौकरी की राह हुई आसान
परिवार में किसी अनहोनी के बाद मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया को अब और आसान बनाया जाएगा। इसके लिए नियमों SOP में बदलाव किया जा रहा है, ताकि जरूरी कागजात जमा करने और आवेदन करने में लोगों को परेशानी न हो। साथ ही मुख्यालय स्तर पर फंसे पुराने मामलों को भी जल्द निपटाया जाएगा।
इलाज की बेहतर सुविधाएं
कर्मचारियों के मेडिकल नियमों में बदलाव की तैयारी है। मुंबई के मशहूर टाटा मेमोरियल अस्पताल में इलाज की सुविधाओं को बढ़ाने और मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की प्रक्रिया को और बेहतर करने पर सहमति बनी है।
महिला कर्मचारियों का खास ख्याल
कार्यस्थल पर महिला कर्मियों की सुविधाओं को बेहतर करने के लिए कोल इंडिया की सभी सहयोगी कंपनियों में अलग से शौचालय बनाए जाएंगे। साथ ही महिलाओं की समस्याओं को सुनने के लिए विशेष महिला कल्याण समितियां भी बनाई जाएंगी।
पानी, सुरक्षा और अन्य सुधार
पीने का साफ पानी: कोल इंडिया की यूनिट्स में लगे 501 RO प्लांट चालू हालत में रहें, इसके लिए यूनियनों ने इनके नियमित रखरखाव की मांग की है।
महिला सुरक्षा गार्ड: पहली बार सुरक्षा विभाग में भर्ती के लिए शारीरिक मानकों में बदलाव करते हुए महिला सुरक्षा कर्मियों के लिए अलग से ऊंचाई का मापदंड तय करने का प्रस्ताव रखा गया है।
सुपरवाइजरों की कमी होगी दूर: बिजली विभाग में सुपरवाइजरों की कमी को दूर करने के लिए योग्य कर्मचारियों को ट्रेनिंग और प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
अहम जानकारी: 17 अप्रैल 2026 को भुवनेश्वर में हुई इस बैठक के आधिकारिक मिनट्स (कार्यवृत्त) को लगभग तीन महीने बाद 14 जुलाई 2026 को जारी किया गया है। नए श्रम कानूनों को लागू करने को लेकर यूनियनों ने साफ किया है कि जब तक सरकार के नियम पूरी तरह स्पष्ट न हों, तब तक जल्दबाजी न की जाए।

