
रांची : झारखंड में बालू घाटों के वैज्ञानिक प्रबंधन और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। विभाग ने झारखंड सैंड माइनिंग रूल्स, 2025 के नियम 14 के तहत कार्यालय आदेश जारी कर राज्य के प्रत्येक बालू खनन क्षेत्र और बालू घाट के संचालन से पहले माइनिंग प्लान तैयार कर उसकी विधिवत स्वीकृति लेना अनिवार्य कर दिया है।
खान विभाग के सचिव अरवा राजकमल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि बिना स्वीकृत माइनिंग प्लान के बालू घाट का संचालन नहीं किया जा सकेगा। माइनिंग प्लान में खनन क्षेत्र, उपलब्ध बालू की मात्रा, खनन की प्रक्रिया और पर्यावरणीय मानकों समेत जरूरी तकनीकी पहलुओं का आकलन किया जाएगा।
विभाग के अनुसार माइनिंग प्लान तैयार करने, उसकी समीक्षा और अनुमोदन की प्रक्रिया झारखंड लघु खनिज समनुदान नियमावली, 2004, जो वर्ष 2026 तक संशोधित है, के प्रावधानों के अनुरूप होगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य बालू खनन को व्यवस्थित करने के साथ अवैध और अनियंत्रित खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
आदेश के मुख्य बिंदु
मंजूरी के बिना खनन पर रोक
राज्य के किसी भी बालू घाट पर माइनिंग प्लान की मंजूरी मिलने तक खनन कार्य शुरू नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा पर्यावरण, वन, जल समेत अन्य सभी अनिवार्य वैधानिक अनापत्तियां और स्वीकृतियां हासिल करना भी जरूरी होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही बालू उठाव की अनुमति दी जाएगी। इसका उद्देश्य बिना अनुमति खनन पर रोक लगाने के साथ बालू घाटों के संचालन को नियमबद्ध करना है।
स्वीकृत मापदंडों के अनुसार ही होगा खनन
बालू घाटों पर खनन कार्य स्वीकृत माइनिंग प्लान में तय मानकों के अनुसार ही किया जा सकेगा। खनन के दौरान स्वीकृत क्षेत्र, बालू उठाव की निर्धारित मात्रा, खनन की गहराई और अपनाई जाने वाली पद्धति में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी कारण से इनमें परिवर्तन जरूरी होता है तो संबंधित एजेंसी या पट्टाधारक को पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेनी होगी। बिना पूर्व स्वीकृति बदलाव करने पर कार्रवाई होगी।
नियमों के उल्लंघन पर डीएमओ तय करेंगे जवाबदेही
बालू घाटों पर माइनिंग प्लान और अन्य नियमों के अनुपालन की निगरानी की जिम्मेदारी जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) की होगी। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित खनन पट्टाधारक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने पूर्व से संचालित बालू घाटों को भी इस व्यवस्था के दायरे में रखा है। ऐसे घाटों के लिए आवश्यकता के अनुसार नया माइनिंग प्लान तैयार या मौजूदा प्लान में संशोधन कराना होगा।

