RANCHI: झारखंड में सरना, सनातन और डीलिस्टिंग को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच राज्य की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर हमला बोला है। मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलता है, किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल के फरमान से नहीं।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि भारतीय संविधान की मूल भावना धर्मनिरपेक्षता है और हर नागरिक को अपनी आस्था, धर्म और पंथ का पालन करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस द्वारा सरना, ईसाई और डीलिस्टिंग जैसे मुद्दों को लेकर जो विमर्श खड़ा किया जा रहा है, उसके पीछे समाज को धार्मिक आधार पर बांटने की राजनीति छिपी है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों को आपस में लड़ाकर सत्ता हासिल करने और जल, जंगल व जमीन पर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। इस दौरान उन्होंने ओडिशा के नियमगिरि और सीजिमाली पहाड़ी क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि खनन परियोजनाओं के खिलाफ वहां आदिवासी समुदाय लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि उनकी आस्था, संस्कृति और अस्तित्व इन क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।
शिल्पी नेहा तिर्की ने छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य का भी जिक्र करते हुए कहा कि वहां जंगलों और आदिवासी जीवन पर खनन परियोजनाओं का गंभीर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति के जरिए आदिवासी हितों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान सामाजिक सौहार्द, आदिवासी-मूलवासी संस्कृति और संघर्ष की विरासत से है। उन्होंने भाजपा और आरएसएस को चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य की जनता नफरत और धार्मिक उन्माद की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी और जल, जंगल, जमीन तथा संविधान की रक्षा के लिए एकजुट रहेगी।

