
घाटशिला। घाटशिला और मुसाबनी के मुख्य मार्गों पर 24 घंटे के भीतर रफ्तार और नशे के कारण हुए दो लगातार सड़क हादसों ने पूरे इलाके को दहला दिया है। जहां एक तरफ अमाईनगर पुलिया के पास हादसे में मासूम बच्ची की जान चली गई, वहीं दूसरी तरफ स्कूली बच्चों से भरी मैजिक को नशे में धुत बाइक सवारों ने रौंद दिया। इन घटनाओं के बाद स्थानीय जनता का आक्रोश चरम पर है। लोगों का सीधा आरोप है कि मुख्य मार्गों से पुलिस गश्त गायब है और इलाके में तेजी से फैल रहा नकली शराब व ब्राउन शुगर का अवैध कारोबार युवा पीढ़ी को बर्बादी के रास्ते पर धकेल रहा है।
घाटशिला अनुमंडल क्षेत्र में पिछले 24 घंटे खून से लथपथ रहे। अमाईनगर पुलिया पर घटे हादसे में घायल 6 वर्षीय बच्ची श्रेयसी सिंह की जमशेदपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस गम से लोग उबरे भी नहीं थे कि गुरुवार को दो और हादसे सामने आए—पहला, सुरदा-मुसाबनी मुख्य मार्ग पर चर्च स्कूल के सामने, जहां नशे में धुत बाइक सवारों ने केंद्रीय विद्यालय के छात्रों से भरी टाटा मैजिक में टक्कर मार दी, जिसमें 6 मासूम छात्र घायल हो गए। वहीं दूसरा हादसा राज स्टेट डूंगरी पहाड़ के पास हुआ, जहां फेरी लगाने वाले दो युवक अज्ञात भारी वाहन की चपेट में आकर जीवन-मौत से जूझ रहे हैं।
नशे का जाल और बर्बादी
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दोनों हादसों की मुख्य वजह नशा और बेलगाम रफ्तार है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर मुख्य सड़कों तक धड़ल्ले से नकली शराब और ओडिशा से आ रहे ब्राउन शुगर जैसे घातक नशे का नेटवर्क तेजी से फैला है। 18 से 25 साल के युवा इस जानलेवा लत की चपेट में आकर न सिर्फ अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि नशे की हालत में सड़कों पर गाड़ी दौड़ाकर आम राहगीरों और मासूम बच्चों की जिंदगी छीन रहे हैं।
प्रशासन की गैर-मौजूदगी पर सवाल
हादसों के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस प्रशासन और परिवहन विभाग की सुस्ती पर खड़ा हो रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्कूल छूटने के समय संवेदनशील क्षेत्रों में न तो कोई ट्रैफिक जवान तैनात दिखता है और न ही मुख्य मार्गों पर नियमित पेट्रोलिंग होती है। शराब और मादक पदार्थों की धरपकड़ केवल कागजों तक सीमित रहने के कारण अवैध धंधेबाजों के हौसले बुलंद हैं, जबकि 108 एंबुलेंस सेवा तक आपात स्थिति में समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
मासूम बच्ची की मौत और जिंदगी की जंग लड़ रहे स्कूली बच्चों की चीखें अब सिस्टम से जवाब मांग रही हैं। यदि घाटशिला प्रशासन ने नशे के इन अवैध अड्डों पर तुरंत सख्त बुलडोजर कार्रवाई नहीं की और सड़कों पर ब्रेथ एनालाइजर व स्पीड चेकिंग अनिवार्य नहीं की, तो यह रफ्तार और नशे का कॉकटेल न जाने और कितने घरों के चिराग बुझा देगा।

