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Jamshedpur news: TRF में स्टैंडअलोन रेवेन्यू घटकर हुई 8,503.22 लख , बीते वर्ष से करीब 30 % कम 

कंपनी को 447.37 लाख रुपये का हुआ समेकित शुद्ध घाटा

by Arvind Shrivastava
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Jamshedpur : टाटा समूह की इंजीनियरिंग कंपनी टीआरएफ (टाटा रॉबिन फ्रेजर) लिमिटेड वित्तीय दबाव से जूझ रही है। कंपनी की 63 वीं वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन से होने वाली आय (स्टैंडअलोन रेवेन्यू) घटकर 8,503.22 लाख रुपये रह गई जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 30 प्रतिशत कमहै। राजस्व में गिरावट का असर मुनाफे पर भी पड़ा और कंपनी को 447.37 लाख रुपये का समेकित शुद्ध घाटा उठाना पड़ा। लगातार घाटे के चलते कंपनी के निदेशक मंडल ने इस वित्त वर्ष के लिए कोई लाभांश (डिविडेंड) नहीं देने का निर्णय लिया है। इससे शेयरधारकों को निराशा हाथ लगी है।                                              कंपनी की 63वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) 6 अगस्त को
कंपनी को 447.37 लाख रुपये का समेकित शुद्ध घाटा उठाना पड़ा।
कंपनी की 63 वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) 6 अगस्त क वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। बैठक में वित्तीय परिणामों की समीक्षा के साथ भविष्य की कारोबारी रणनीति पर चर्चा की जाएगी। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड (टीएसयूआईएसएल) के साथ 3,000 लाख रुपये (30 करोड़ रुपये) तक के रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन को मंजूरी देना है। इस प्रस्ताव पर शेयरधारक 1 से 5 अगस्त के बीच रिमोट ई-वोटिंग के जरिए अपनी राय दे सकेंगे। कंपनी का मानना है कि इस तरह के व्यावसायिक समझौते भविष्य में कारोबार को गति देने में मददगार साबित हो सकते हैं
राजस्व घटा, शेयरों पर भी दिखा असर
टीआरएफ के कमजोर वित्तीय प्रदर्शन का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया है। पिछले एक वर्ष में कंपनी के शेयर मूल्य में करीब 34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह कंपनी के पारंपरिक कारोबार पर बढ़ते दबाव और नए ऑर्डर की सीमित उपलब्धता का संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि टीआरएफ को अब केवल टाटा समूह की कंपनियों से मिलने वाले कार्यों पर निर्भर रहने के बजाय खनन, सीमेंट, बंदरगाह, ऊर्जा और मटेरियल हैंडलिंग जैसे क्षेत्रों में नए ग्राहकों और परियोजनाओं की तलाश करनी होगी। तकनीकी उन्नयन और प्रतिस्पर्धी उत्पादों के जरिए ही कंपनी दोबारा विकास की राह पकड़ सकती है।
लिक्विडिटी बनी हुई है, यही सबसे बड़ी ताकत
हालांकि कंपनी के लिए राहत की बात यह है कि उसके पास फिलहाल 2,311 लाख रुपये की लिक्विडिटी उपलब्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस राशि का उपयोग परिचालन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने और रणनीतिक निवेश में किया जाए तो कंपनी के प्रदर्शन में सुधार संभव है। अब निवेशकों की निगाहें 6 अगस्त को होने वाली एजीएम पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि कंपनी प्रबंधन मौजूदा चुनौतियों से बाहर निकलने और मुनाफे में वापसी के लिए स्पष्ट रोडमैप पेश करेगा।

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