
रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को झारखंड मंत्रालय में अधिकारियों की उपस्थिति में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाओं को हर हाल में उन तक पहुंचाएं। निर्धारित समय सीमा के अन्तर्गत किसानों को खाद, बीज, तकनीकी मार्गदर्शन सहित आवश्यक संसाधनों का लाभ मिले, विभाग यह सुनिश्चित करे।
मुख्यमंत्री ने सुखाड़ को देखते हुए कार्य योजना तैयार करने का निर्देश भी अधिकारियों को दिया। मुख्यमंत्री ने किसान क्रेडिट कार्ड, पशुधन विकास योजना, बीज-खाद वितरण, कोल्ड स्टोरेज, लैम्प्स पैक्स, व्यापार मंडल और सहकारी समितियों के कार्य, जल स्रोतों के पुनरुद्धार आदि से संबंधित योजनाओं एवं कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और अधिकारियों को कई अहम दिशा-निर्देश दिए। बैठक में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी उपस्थित रहीं।
दलहन एवं मिलेट की खेती को दें बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने राज्य में दलहन एवं मिलेट की खेती को बढ़ावा देने का निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने ने कहा कि राज्य के भीतर कुछ जिलों के किसानों ने दलहन एवं मिलेट के क्षेत्र में अच्छा काम किया है। राज्य में मिलेट उत्पादन की असीम संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के सभी जिलों में कृषि विभाग के लिए भूमि उपलब्ध है। सभी जिलों के कम एक-एक गांव अथवा पंचायत को चिह्नित कर मॉडल कृषक पाठशाला संचालित किए जाने की योजना को मूर्त रूप दें। उन्होंने किसानों को तकनीक आधारित कृषि के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान प्रदान किए जाने का निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान समय में राज्य के भीतर 57 किसान पाठशाला संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि कृषक पाठशालाओं के बेहतर संचालन के लिए राज्य के भीतर कृषि विश्वविद्यालयों सहित अन्य संबंधित संस्थाओं से समन्वय बनाकर किसानों को नवीनतम तकनीक आधारित कृषि के लिए प्रशिक्षण दें।
किसान समृद्धि योजना का लाभ अधिक से अधिक कृषकों को मिले
मुख्यमंत्री ने किसान समृद्धि योजना का लाभ अधिक-से-अधिक कृषकों को मिले, इस पर विशेष बल दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य खेतों की सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपसेट उपलब्ध कराना है। राज्य सरकार की यह सोच है कि खेती-कृषि कार्य की लागत को कम की जाए, ताकि किसान परिवार की आमदनी को बढ़ाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि किसान समृद्धि योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा किसानों को दी जा रही सोलर आधारित पंपसेट वितरण को गति प्रदान करें। इससे किसानों की आर्थिक बचत होगी और बिजली से निर्भरता भी घटेगी।
प्रोक्योरमेंट सिस्टम विकसित करने एवं अल्प वर्षा को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना बनाए
वर्तमान समय में राज्य हो रहे कम वर्षापात को गंभीरता से लेते हुए कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता के क्षेत्र में प्रोक्योरमेंट सिस्टम विकसित करने एवं सुखाड़ के मद्देनजर योजनाएं तैयार करने का स्पष्ट निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पलामू प्रमंडल के जिलों में प्रतिवर्ष कम बारिश के कारण सुखाड़ की स्थिति बनी रहती है। इन जिलों में कम बारिश के कारण धान का आच्छादन कमजोर रहता है। पलामू प्रमंडल के अलावा राज्य के कम बारिश वाले जिलों के किसानों को दलहन एवं मिलेट के फसलों के लिए प्रोत्साहित करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्प वर्षा जैसी परिस्थितियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए किसानों को कम पानी में उपज होने वाले खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने जैविक खेती, व्यावसायिक खेती तथा जल संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया।
किसानों की समृद्धि सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी कृषि और इससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है। किसानों की आय में वृद्धि, आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रसार तथा कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम किसान परिवार तक पहुंचे, इसके लिए अधिकारी पूरी संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें।
प्रत्येक जिले में मशरूम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने राज्य में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मशरूम उत्पादन से जुड़े किसानों को मैपिंग करने एवं प्रत्येक जिले में मशरूम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्देश दिया। साथ ही मशरूम उत्पादन में महिलाओं को जोड़ते हुए महिला किसान प्रोड्यूसर ग्रुप बनाकर मशरूम उत्पादन एवं मशरूम स्पॉन बनाने का प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने मधुमक्खी पालन को भी बढ़ावा पर बल दिया। साथ ही मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों को मधुमक्खी कीट के साथ एप्रॉन अथवा पीपीई कीट टाइप का विशेष पोशाक देने का निर्देश दिया, ताकि मधुमक्खी काटने के खतरे से बचा जा सके।
गांव अथवा पंचायत को बनाएं कृषि का मॉडल
उन्होंने कहा कि किसी जिले के गांव अथवा पंचायत को चिह्नित कर उसका पूरा सर्वे कराते हुए किसानों के साथ बैठक एवं मिट्टी जांच से लेकर सिंचाई की सुविधाएं आदि मुलभूत आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कृषि का मॉडल गांव अथवा पंचायत को बनाएं। प्रारंभिक तौर पर इसे पायलट प्रोजेक्ट के तहत करें और इसमें स्थानीय युवाओं और किसानों को जोड़ने का कार्य करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की कृषक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ राज्य के अधिक-से-अधिक पात्र किसानों तक पारदर्शी ढंग से पहुंचाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक ही किसान को सरकार की अनेक योजनाओं का बार-बार लाभ देने के बजाए पात्र लाभार्थियों का दायरा बढ़ाया जाए, ताकि अधिकाधिक किसानों को योजनाओं से जोड़ा जा सके।
भूमि संरक्षण के तहत संचालित योजनाओं का लाभ लाभार्थियों को पारदर्शी तरीके देने का निर्देश दिया।
पशुपालन और दुग्ध उत्पादन क्षेत्र को गति प्रदान करना लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने पशुपालन विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने दुग्ध उत्पादन, बकरी पालन, सूकर पालन, कुक्कुट पालन को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। साथ ही पशुओं के नियमित टीकाकरण, बेहतर पशु चिकित्सा सेवाओं तथा आधुनिक पशु चिकित्सालयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। पशुपालन विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि माइनिंग एरिया में कृषि कार्य में कमी आ रही है। इन क्षेत्रों में मुर्गी पालन, बकरी पालन करवाते हुए किसानों की आर्थिक आमदनी को बढ़ाते हुए विजनेस का मॉडल तैयार करें। उन्होंने ब्रिडिंग फॉर्म की स्थिति में सुधार लाने और राज्य के केन्द्रीय काराओं के लिए डेयरी फॉर्म का कॉन्सेप्ट बनाने का निर्देश दिया, कारा में रह रहे सजायाफ्ता रोजगार से जुड़ सकें।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मत्स्य पालन में झारखंड अच्छा कार्य कर रहा है, जरूरत है इसे और बेहतर किया जाए। मत्स्य पालन में युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। आने वाले समय में मत्स्य पालन आर्थिक समृद्धि का बेहतर आधार बन सकता है।
एग्रीकल्चर इको सिस्टम तथा कॉमर्शियल मॉडल विकसित कराएं
मुख्यमंत्री ने राज्य में दुग्ध की उत्पादकता को बढ़ाने पर बल दिया। वहीं राज्य के पशुपालकों का डेटा बेस तैयार कर मिल्क फेडरेशन के साथ जोड़ने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने पशु मेला के लिए कैलेण्डर तैयार करते हुए प्रमंडल स्तरीय पशु मेला आयोजित करने का निर्देश दिया। जगन्नाथपुर रथ मेला का उदाहरण देते हुए एग्रीकल्चर इको सिस्टम तथा पशुपालन के लिए कॉमर्शियल मॉडल विकसित करने का निर्देश दिया।
तकनीक आधारित कृषि को बढ़ावा देने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कृषि क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग किया जाए। किसानों को मौसम आधारित सलाह, आधुनिक खेती एवं तकनीक, उन्नत बीज, फसल विविधीकरण तथा बाजार से बेहतर जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए तथा जिला एवं प्रखंड स्तर पर उनके क्रियान्वयन की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ प्रत्येक पात्र किसान, पशुपालक एवं ग्रामीण परिवार तक पहुंचाना है। इसके लिए विभागीय समन्वय, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करना आवश्यक है।
लैम्पस एवं पैक्स को अधिक सक्रिय करें
मुख्यमंत्री ने सहकारिता संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियां किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मुख्यमंत्री ने राज्य के लैम्प्स एवं पैक्स को अधिक सक्रिय बनाने, किसानों से कृषि उत्पाद की खरीद एवं उन्हें उत्पाद के बदले राशि स्थानांतरण कराने सहित सहकारी गतिविधियों को पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से संचालित करने का निर्देश अधिकारियों को दिए।
लाभार्थी किसानों से की बात
मुख्यमंत्री ने झारखंड मंत्रालय में बैठक के दौरान वीडियो कॉल के माध्यम से गढ़वा जिले के भवनाथपुर में अवस्थित किसान पाठशाला की वस्तुस्थिति का जायजा लिया। उन्होंने वहां कार्यरत परियोजना प्रबंधक डॉ प्रदीप कुमार सैनी से ऑनलाइन बात कर वहां हो रहे कार्यों की अद्यतन जानकारी ली।

