
जमशेदपुर : अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खान-पान, तनाव और नींद की कमी के कारण महिलाओं में PCOS यानी ‘पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम’ की समस्या तेजी से सामने आ रही है। यह हार्मोन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी ऐसी स्थिति है, जिसमें पीरियड्स का अनियमित होना, वजन बढ़ना, मुंहासे, चेहरे पर अनचाहे बाल, बालों का झड़ना और गर्भधारण में परेशानी जैसे लक्षण हो सकते हैं। वजन नियंत्रित करने के लिए कई महिलाएं इंटरमिटेंट फास्टिंग का सहारा ले रही हैं, लेकिन इसे अपनाने से पहले सही जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

अन्नु सिन्हा
एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल की डायटीशियन अन्नु सिन्हा के अनुसार, PCOS से प्रभावित कुछ महिलाओं के लिए सही तरीके से की गई इंटरमिटेंट फास्टिंग लाभकारी साबित हो सकती है। हालांकि, इसे हर महिला के लिए एक जैसा सुरक्षित या PCOS का पूर्ण उपचार नहीं माना जा सकता।
क्या है इंटरमिटेंट फास्टिंग?
इंटरमिटेंट फास्टिंग में खाने की चीजों से अधिक भोजन करने के समय पर ध्यान दिया जाता है। इसके टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग तरीके में दिन के निश्चित घंटों के भीतर भोजन किया जाता है और बाकी समय खाने से परहेज रखा जाता है। डायटीशियन अन्नु सिन्हा बताती हैं कि यह व्यवस्था कुछ लोगों को अनावश्यक स्नैकिंग और भोजन की मात्रा नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। लेकिन लंबे समय तक भूखा रहना या शरीर की जरूरत से कम भोजन करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस पर पड़ सकता है प्रभाव
PCOS से प्रभावित कई महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या पाई जाती है। इसमें शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर और वजन बढ़ने की आशंका हो सकती है। संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाने से कुछ महिलाओं को वजन तथा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य संभालने में सहायता मिल सकती है। वजन नियंत्रित होने पर पीरियड्स और कुछ हार्मोन संबंधी लक्षणों में भी सुधार देखा जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग महिलाओं में इसके परिणाम भिन्न हो सकते हैं।
फास्टिंग से ज्यादा जरूरी संतुलित भोजन
अन्नु सिन्हा के मुताबिक, केवल भोजन का समय सीमित कर देना पर्याप्त नहीं है। खाने के दौरान शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलना भी बेहद आवश्यक है। महिलाओं को अपने आहार में पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर और स्वास्थ्यवर्धक वसा शामिल करनी चाहिए।
दालें, हरी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज, सलाद, मेवे और बीज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ लिए जा सकते हैं। अत्यधिक मीठे पेय, मैदा, तली हुई वस्तुओं और बहुत अधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना चाहिए। इसके साथ नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
इन महिलाओं को बरतनी होगी विशेष सावधानी
गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं, मधुमेह अथवा दूसरी बीमारी से पीड़ित महिलाओं और नियमित दवाएं लेने वालों को डॉक्टर की सलाह के बिना इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू नहीं करनी चाहिए। किशोरियों को भी स्वयं लंबी फास्टिंग नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस उम्र में शरीर के विकास के लिए संतुलित पोषण आवश्यक होता है। यदि फास्टिंग के दौरान चक्कर, कमजोरी, अत्यधिक भूख, सिरदर्द या दूसरी परेशानी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञ की सलाह से ही करें शुरुआत
डायटीशियन अन्नु सिन्हा का कहना है कि PCOS का प्रबंधन प्रत्येक महिला की उम्र, स्वास्थ्य, दिनचर्या और पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार होना चाहिए। इसलिए इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य डायटीशियन से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।
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