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Chaibasa News : प्रोजेक्ट परिवर्तन – हुनर से पहचान : मंडल कारा में 6 दिवसीय व्यावसायिक कृषि प्रशिक्षण संपन्न, 40 बंदियों को मिला प्रमाण पत्र

by Rajeshwar Pandey
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चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल “प्रोजेक्ट परिवर्तन – हुनर से पहचान” के तहत चाईबासा मंडल कारा में चल रहे व्यावसायिक कृषि प्रशिक्षण के तीसरे सत्र का बुधवार को समापन हो गया। आरसेटी, चाईबासा द्वारा आयोजित इस 6 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में उपायुक्त मनीष कुमार और उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने शिरकत की और प्रशिक्षण प्राप्त बंदियों का हौसला बढ़ाया।

समारोह के दौरान दोनों अधिकारियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने वाले 40 बंदियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया। इस अवसर पर मंडल कारा अधीक्षक सुनील कुमार, आरसेटी के प्रबंधक, प्रशिक्षक और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी बंदी उपस्थित थे।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कारा में निरुद्ध बंदियों को उपयोगी हुनर से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और भविष्य में सम्मानजनक आजीविका के लिए तैयार करना है। छह दिनों तक चले इस शिविर में बंदियों को सब्जी और फल उत्पादन, जैविक खाद बनाना, प्लास्टिक कचरे के पुन: उपयोग से पौधारोपण करना और बीज उत्पादन जैसी कृषि आधारित व्यावसायिक गतिविधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि बंदी प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए ज्ञान और कौशल का सही तरीके से उपयोग करें। यहां से बाहर निकलने के बाद इस हुनर का उपयोग कर वे स्वरोजगार कर सकते हैं और अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

Six-day vocational agriculture training concludes at Chaibasa Jail

चाईबासा जेल में प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम में शामिल बंदी

वहीं उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने कहा कि जिसके हाथ में हुनर होता है, वह कभी बेरोजगार नहीं रहता। प्रशिक्षण में जो ज्ञान मिला है, उसे मेहनत और लगन से जीविकोपार्जन का साधन बनाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि “प्रोजेक्ट परिवर्तन – हुनर से पहचान” के माध्यम से जिला प्रशासन मंडल कारा के बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रहा है। इस पहल से बंदियों को न सिर्फ कौशल मिल रहा है, बल्कि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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