
रांची : 14वीं जेपीएससी परीक्षा धांधली मामले में आरोपियों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। रांची के अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी अभय तिवारी और उमेश कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद दोनों आरोपियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
इस घोटाले की जांच सीआईडी की टीम कर रही है। सीआईडी ने परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान अब तक 20 से भी ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच में सामने आया है कि अभय तिवारी पहले टीडीपीएल कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर रह चुका है। उस पर आरोप है कि उसने पैसों के बदले कई अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से नौकरी दिलाई। अपने करीबी रिश्तेदारों को भी अनुचित लाभ पहुंचाया। गोड्डा में खाद्य आपूर्ति विभाग में पदस्थापित रहने के दौरान उसे गिरफ्तार किया गया था।
पूछताछ के दौरान अभय तिवारी ने सीआईडी के सामने कई सनसनीखेज खुलासे किए। उसने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते का नाम भी इस घोटाले में घसीटा है। अभय के अनुसार, ब्लैकलिस्टेड कंपनी टीडीपीएल को परीक्षा आयोजित करने का ठेका दिलाने में पूर्व अध्यक्ष की मुख्य भूमिका थी।
सीआईडी ने मामले में पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की थी, जिसके बाद वे भी जेल में बंद हैं। कोर्ट के इस कड़े रुख से परीक्षा में धांधली करने वाले सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है। फर्जीवाड़े के इस बड़े मामले में सीआईडी की कार्रवाई लगातार जारी है।

