
रांची : आजसू पार्टी के प्रमुख और झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर कुड़मी को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग की है। उनके साथ बैठक के दौरान उन्होंने झारखंड की जनता और युवाओं से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने गृह मंत्री को एक मांग पत्र सौंपा और इन सभी विषयों पर तत्काल ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया।
सुदेश महतो ने कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की पुरानी मांग को फिर से मजबूती से उठाया। उन्होंने अमित शाह से इस विषय पर सकारात्मक कदम उठाने की अपील की। आजसू अध्यक्ष का कहना था कि कुड़मी समुदाय को एसटी श्रेणी में शामिल करने से उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक स्थिति में बड़ा सुधार होगा। इससे इस पूरे समुदाय के समग्र विकास के लिए नए रास्ते खुलेंगे।
प्रतियोगी परीक्षाओं की हो सीबीआई और ईडी जांच
राज्य के युवाओं की चिंताओं को सामने रखते हुए उन्होंने जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। सुदेश महतो ने आरोप लगाया कि राज्य की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भारी अनियमितता, पेपर लीक और आर्थिक घोटाले हुए हैं।
उन्होंने इन सभी मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय से कराने की मांग की। ज्ञापन में बताया गया कि राज्य की करीब 39 परीक्षाएं संदेह के घेरे में हैं और 6 परीक्षाओं को सरकार ने रोक दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।
खनिज सेस लगाने और डीएमएफ फंड में घोटाले की जांच
खनिज समृद्ध क्षेत्रों की चर्चा करते हुए सुदेश महतो ने राज्य में ‘मिनरल बेयरिंग लैंड सेस’ लागू करने की मांग रखी। उनका कहना था कि खनन से मिलने वाले इस कर की पूरी राशि केवल प्रभावित परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने और बुनियादी ढांचे के विकास पर ही खर्च होनी चाहिए। इसकी निगरानी केंद्र सरकार के स्तर पर की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के फंड में हुए कथित घोटालों की भी सीबीआई जांच कराने का आग्रह किया, ताकि प्रभावित क्षेत्र के लोगों को उनका हक मिल सके।
क्षेत्रीय भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह देने की अपील
झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए उन्होंने तीन प्रमुख स्थानीय भाषाओं का मुद्दा भी उठाया। सुदेश महतो ने कुड़माली, कुड़ुख और मुंडारी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि भाषाएं किसी भी समाज की आत्मा और पहचान होती हैं। इन्हें संवैधानिक संरक्षण मिलने से राज्य की सांस्कृतिक विरासत को नया जीवन मिलेगा और स्थानीय जनजातीय समुदायों का सामाजिक विकास और तेज होगा।

