
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने जैप में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के पद पर नियुक्त दिकेश कुमार समेत अन्य कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार को बर्खास्तगी से पुनर्बहाली तक की अवधि का पूरा बकाया वेतन और सभी परिणामी सेवा लाभ आठ सप्ताह में देने का निर्देश दिया है।
मामला वर्ष 2016 में जैप में हुई चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा है। नियुक्ति में अनियमितता की शिकायत पर सरकार ने चयन प्रक्रिया रद्द कर कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी थी। हाईकोर्ट ने बाद में सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर कर्मचारियों को बहाल करने का निर्देश दिया था। हालांकि, सरकार ने बर्खास्तगी अवधि का वेतन देने से इनकार कर दिया था।
दिकेश कुमार समेत अन्य ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। अदालत ने सरकार की ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ की दलील खारिज करते हुए कहा कि सेवा समाप्ति का आदेश रद्द होने के बाद कर्मचारियों को बर्खास्तगी अवधि के वेतन और अन्य सेवा लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
9 माह से वेतन नहीं, हाईकोर्ट ने एमडी और चेयरमैन को किया तलब
झारखंड हाईकोर्ट ने ट्रांसफर के बाद करीब नौ माह से वेतन नहीं मिलने के मामले को गंभीरता से लिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने झारखंड राज्य कृषि उत्पादन पर्षद के एमडी और चेयरमैन को 14 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि ट्रांसफर और पोस्टिंग का सक्षम प्राधिकार कौन है और एमडी के आदेश को चेयरमैन ने किस नियम के तहत रद्द किया।
मामला मार्केटिंग सुपरवाइजर रमेश कुमार शर्मा से जुड़ा है। उनका 30 दिसंबर 2025 को गढ़वा से कोडरमा तबादला हुआ था। उन्होंने एक जनवरी 2026 को कोडरमा में योगदान भी दे दिया। इसके बावजूद उन्हें वेतन नहीं मिला। एलपीसी जमा करने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ।
सुनवाई के दौरान बताया गया कि चेयरमैन ने मई 2026 में ट्रांसफर आदेश रद्द कर दिया था। अदालत ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सक्षम प्राधिकारी के आदेश पर योगदान हो चुका था, तो उसे रद्द करने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। अदालत ने पर्षद की ओर से पेश नियम को स्वीकार नहीं किया और एमडी व चेयरमैन को तलब किया।
बैंक जालसाजी के आरोपी को हाईकोर्ट से राहत नहीं
झारखंड हाईकोर्ट ने एसबीआई की रांची कॉमर्शियल ब्रांच के तत्कालीन अधिकारी मुरारी प्रसाद बर्णवाल को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने अग्रिम जमानत के लिए सिविल कोर्ट में 10 लाख रुपये जमा करने की शर्त हटाने की उनकी याचिका खारिज कर दी।
सीबीआई बैंक जालसाजी के मामले में उनकी जांच कर रही है। आरोप है कि उन्होंने मेसर्स रेणुकरा पॉलिसैक्स प्राइवेट लिमिटेड को नियमों के विपरीत कर्ज दिया और ऋण सीमा बढ़ाई। मामले में सरकारी जमीन गिरवी रखने का भी आरोप है।
हाईकोर्ट ने 2021 में उनके आश्वासन पर 10 लाख रुपये जमा करने की शर्त के साथ अग्रिम जमानत दी थी। निर्धारित समय में राशि जमा नहीं करने पर 2022 में अतिरिक्त समय भी दिया गया, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ। वर्ष 2026 में उन्होंने शर्त हटाने की मांग की। अदालत ने कहा कि स्वयं स्वीकार की गई शर्त से अब पीछे नहीं हटा जा सकता।
बीटेक डिग्री रद्द होने के बाद पदोन्नति भी खत्म
झारखंड हाईकोर्ट ने एनएचएआई के एक अधिकारी की पदोन्नति से जुड़े मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के आदेश को रद्द कर दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने अधिकारी को डिप्टी जनरल मैनेजर (टेक्निकल) से टेक्निकल असिस्टेंट पद पर वापस भेजने के एनएचएआई के आदेश को बहाल कर दिया।
अधिकारी को जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ से प्राप्त बीटेक डिग्री के आधार पर पदोन्नति मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस डिग्री को रद्द कर दिया था। इसके बाद एनएचएआई ने अधिकारी को पदावनत कर दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता की कमी को अनुभव के आधार पर पूरा नहीं किया जा सकता। अदालत ने कैट के आदेश को रद्द करते हुए एनएचएआई के रिवर्जन आदेश को बहाल कर दिया।
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