
घाटशिला : विश्वविद्यालय में आयोजित हिंदी पखवाड़ा-2026 के समापन समारोह में कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुआ ने हिंदी को ज्ञान, संस्कृति, संवेदना एवं संवाद की सशक्त भाषा बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी का विकास केवल भाषायी विकास नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा एवं सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
कुलपति ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने तथा इसे आधुनिक तकनीक, शिक्षा, शोध एवं नवाचार से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदी को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान एवं तकनीकी विकास के साथ जोड़कर ही इसे वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने नई पीढ़ी को हिंदी में ज्ञान-सृजन, शोध एवं रचनात्मक कार्य के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि हिंदी को भविष्य की तकनीकी एवं ज्ञान आधारित दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा।
हिंदी भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय चेतना की महत्वपूर्ण कड़ी : कुलाधिपति
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने हिंदी को भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा बताया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता में एकता को मजबूत करने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंदी विभिन्न क्षेत्रों एवं समुदायों के बीच संवाद एवं जुड़ाव का कार्य करती है।
कुलाधिपति ने कहा कि हिंदी की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए इसे नई पीढ़ी की आवश्यकताओं, आधुनिक तकनीक एवं नवाचार के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने साहित्यकार विभूतिभूषण उपाध्याय का स्मरण करते हुए हिंदी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा का वास्तविक संरक्षण केवल उसके सम्मान से संभव नहीं है, बल्कि उसके निरंतर और व्यापक प्रयोग से ही भाषा जीवंत रहती है।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार एवं विद्यार्थियों से हिंदी के प्रति गर्व एवं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने तथा हिंदी को आधुनिकता और नवाचार के नए आयामों से जोड़ने का आह्वान किया।
समारोह के अंत में इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कंचन सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथियों, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने हिंदी पखवाड़ा-2026 को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि एवं सम्मान पैदा करने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को भी मंच प्रदान करते हैं। समारोह का समापन हिंदी के प्रति सम्मान, गौरव एवं आत्मीयता की भावना को मजबूत करने तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हिंदी के अधिकाधिक, सार्थक एवं व्यवहारिक प्रयोग के संकल्प के साथ हुआ।
Read Also: Ghatshila News : मंत्र-जप से एकाग्रता और आत्म-अनुशासन का विकास : मोन्क डॉ. चन्द्रकीर्ति

