
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की लचर व्यवस्था एक बार फिर खुलकर सामने आई है। अस्पताल परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब ओपीडी में दोपहर तक डॉक्टरों के नहीं पहुंचने के कारण हंगामा शुरू हो गया। आरोप है कि दोपहर के 12 बज जाने के बावजूद अस्पताल में एक भी चिकित्सक मौजूद नहीं था। दूर-दूर से इलाज की आस में पहुंचे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
इलाज कराने स्कूल से पहुंचे थे कई बच्चे
इस दौरान सबसे ज्यादा परेशानी उन स्कूली बच्चों को उठानी पड़ी जो अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर या स्कूल से विशेष अनुमति लेकर अपना इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे। इस दिन ओपीडी कक्ष में चिकित्सक डॉ. अभिषेक कुमार की तैनाती थी। हालांकि, तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी उनके अस्पताल न पहुंचने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
टूटा मरीजों का सब्र, शुरू हो गया हंगामा
लगातार कई घंटे तक डॉक्टरों का इंतजार करते-करते जब मरीजों का सब्र टूट गया, तो उन्होंने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने तुरंत मामले से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार को फोन के माध्यम से अवगत कराया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए प्रभारी ने फौरन दूसरे डॉक्टर को ओपीडी सेवा संभालने के लिए भेजा।
दूसरे विभाग के डॉक्टर ने संभाला OPD
इस लचर और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के बाद एक बार फिर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ओपीडी में हंगामा होता देख दूसरे डॉक्टर को भेजे जाने के बाद मरीजों की जांच और उपचार की प्रक्रिया शुरू हो सकी। फिलहाल मामला तो शांत हो गया लेकिन आम जनता का कहना है कि यदि अस्पताल में समय पर चिकित्सक ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो ऐसी स्वास्थ्य सेवाओं का क्या लाभ? समय पर चिकित्सीय परामर्श न मिलने के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों की जान पर भी संकट आ सकता है। अब यह देखना बेहद अहम होगा कि उच्चाधिकारी इस घटना को कितनी संवेदनशीलता से लेते हैं।

