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आखिर क्यों मां लक्ष्मी को रखा जाता है गणेश जी की दाईं ओर? जानें इसकी धार्मिक मान्यता

by Rakesh Pandey
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फीचर डेस्क : दीवाली का पर्व विशेष रूप से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का पर्व है। इस दिन, घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली लाने के लिए इन दोनों की पूजा की जाती है। हालांकि, पूजा करते समय यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि उनकी मूर्तियों को किस दिशा में रखा जाए। सही दिशा में मूर्तियां स्थापित करने से न केवल पूजा का महत्व बढ़ता है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी सुनिश्चित होता है। आइए जानते हैं लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियों को किस दिशा में रखना चाहिए और उनके महत्व को समझते हैं। बाएं ओर पत्नी का स्थान होता है और लक्ष्मी माता गणेश जी की पत्नी नहीं बल्कि मां सामना है। इसी कारण उन्हें हमेशा गणेश जी के दाएं ओर स्थापित करना चाहिए।

लक्ष्मी जी की मूर्ति की दिशा

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)

लक्ष्मी जी की मूर्ति को हमेशा ईशान कोण, यानी उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना सर्वोत्तम माना जाता है। यह दिशा समृद्धि, धन और खुशी का प्रतीक मानी जाती है। यहां लक्ष्मी जी की मूर्ति रखने से घर में धन की वर्षा और आर्थिक समृद्धि का अनुभव होता है।

पूजा स्थान की सजावट

लक्ष्मी जी की मूर्ति को पूजा स्थान के केंद्र में रखना चाहिए ताकि उनकी कृपा सभी सदस्यों पर समान रूप से पड़े। इसके अलावा, पूजा करते समय स्थान को साफ-सुथरा और सुगंधित रखें। फूल, फल और मिठाई अर्पित करें ताकि पूजा का माहौल और भी शुभ बन सके।

गणेश जी की मूर्ति की दिशा

पश्चिम दिशा

गणेश जी की मूर्ति को पश्चिम दिशा में रखना लाभदायक होता है। यह दिशा सफलता और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। गणेश जी को इस दिशा में स्थापित करने से न केवल घर के सदस्यों के कार्य में सफलता मिलती है, बल्कि यह घर में सुख-शांति भी लाता है।

दक्षिण-पूर्व कोण

गणेश जी को दक्षिण-पूर्व दिशा में भी रखा जा सकता है। यह दिशा धन की दिशा मानी जाती है। यदि आप अपने व्यापार या आर्थिक मामलों में वृद्धि चाहते हैं, तो गणेश जी की मूर्ति को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ रहेगा।

मूर्तियों की स्थापना के दौरान ध्यान देने योग्य बातें

सही स्थान का चुनाव

पूजा स्थान का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि वह स्थान घर के केंद्रीय क्षेत्र में हो। इससे लक्ष्मी और गणेश जी की कृपा का लाभ सभी सदस्यों को मिलता है।

उचित सजावट


लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियों के चारों ओर फूलों और दीपों से सजावट करें। इससे पूजा का माहौल और भी पवित्र और शुभ बनता है। विशेषकर दीयों को जलाना न भूलें, क्योंकि यह अंधकार को दूर करने और ज्ञान की रोशनी फैलाने का प्रतीक है।

लक्ष्मी और गणेश की पूजा करते समय उनकी मूर्तियों को सही दिशा में रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ईशान कोण में लक्ष्मी जी और पश्चिम या दक्षिण-पूर्व दिशा में गणेश जी की मूर्ति रखकर, आप अपने घर में सुख, शांति और समृद्धि को आमंत्रित कर सकते हैं। पूजा करते समय श्रद्धा और विश्वास का पालन करें, ताकि देवी-देवताओं की कृपा आप पर सदैव बनी रहे। दीवाली का पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का संदेश भी है, जिसे सही दिशा और विधि से मनाना चाहिए।

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