- गुमला से भरदा तक प्रस्तावित है 32.370 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना
- भारतमाला परियोजना के तहत बनने वाली इस सड़क की अब दूर हुईं सारी बाधाएं
- साल 2024 में ही शिवालिया कंस्ट्रक्शन को इस सड़क निर्माण का दिया गया था काम
Ranchi : करीब डेढ़ से दो साल से लंबित छत्तीसगढ़-झारखंड बॉर्डर से गुमला-भरदा तक प्रस्तावित 32.370 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क परियोजना को आखिरकार नया जीवन मिल गया है। 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में इस परियोजना को लेकर उत्पन्न विवाद सुलझा लिया गया और औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। लगभग 781 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क भारतमाला परियोजना के तहत तैयार की जानी है।

इस संबंध में नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया और गुमला हाईवेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच सहमति बनी, जिससे परियोजना को बंद होने से बचा लिया गया। समझौते के बाद गुमला और आसपास के लोगों में राहत और उम्मीद का माहौल है तथा इसे क्षेत्रीय विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह सड़क छत्तीसगढ़ के रायपुर से झारखंड के धनबाद जिले को जोड़ने वाली इकोनामिक कॉरिडोर का हिस्सा है।
इस सड़क के निर्माण का काम शिवालिया कंस्ट्रक्शन को वर्ष 2024 में आवंटित हुआ था, लेकिन निर्माण शुरू होने से पहले ही भूमि उपलब्धता और वन भूमि स्वीकृति जैसी प्रक्रियाओं में देरी के कारण परियोजना अटक गई थी। निर्धारित समय के भीतर अप्वाइंटमेंट डेट, कार्यारंभ की तिथि घोषित नहीं हो पाई थी, जिससे समझौते की शर्तों के अनुसार परियोजना स्वतः समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गई थी। इसी कारण करीब डेढ़-दो वर्षों तक यह योजना ठप पड़ी रही।
18.1075 हेक्टेयर वन भूमि का मिला क्लीयरेंस
स्थिति में बदलाव तब आया, जब 18.1075 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की प्रथम चरण की अनुमति 22 दिसंबर 2025 को मिल गई और कुल लंबाई में से लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा बिना अवरोध उपलब्ध हो गया। इसके बाद दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत और सुलह के माध्यम से 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में समझौता कर लिया। इस समझौते के बाद अब निर्माण कार्य को तेजी मिलने की उम्मीद है। यह फोरलेन सड़क बनने से छत्तीसगढ़ सीमा से गुमला और आसपास के इलाकों का संपर्क काफी बेहतर हो जाएगा। यात्रा समय में कमी आएगी और भारी वाहनों की आवाजाही अधिक सुरक्षित और सुगम होगी।
व्यावसायिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
इस रोड से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, कृषि उत्पादों और अन्य सामान की ढुलाई आसान होगी तथा स्थानीय बाजारों को नई गति मिलेगी। निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और सड़क पूरी होने के बाद क्षेत्र में छोटे उद्योगों, परिवहन व्यवसाय और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी।

