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भीम संसद में सीएम का शक्ति प्रदर्शन, बिहार को विशेष राज्य के दर्जे के लिए जनता से मांगा समर्थन

by Rakesh Pandey
भीम संसद में सीएम का शक्ति प्रदर्शन
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पटना: पटना के वेटेनरी कॉलेज में रविवार को आयोजित भीम संसद के माध्यम से मुख्यमंत्री ने अपनी ताकत का पूरा प्रदर्शन किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक तरह से जदयू के चुनावी अभियान का आगाज कर दिया। इस दौरान लाखों की संख्या में जुटे लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बिहार को विशेष राज्य के दर्जे के लिए जनता से समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की उनकी पुरानी मांग पर बड़ा अभियान आरंभ होने जा रहा है।

इस अभियान को सफल बनाने के लिए उन्हें पूरे बिहारवासियों के समर्थन की जरूरत है। तभी हमारा बिहार आगे बढ़ पाएगा। कार्यक्रम में सीएम ने अनुसूचित जाति के लोगों के लिए चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी।

बाबा साहेब ने सामाजिक परिवर्तन की जो बुनियाद रखी, उसे आगे बढ़ाएंगे

राज्य के भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी की अगुवाई में आयोजित भीम सांसद कार्यक्रम में मौजूद लोगों को मुख्यमंत्री ने यह संकल्प भी दिलाया कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने सामाजिक परिवर्तन की, जो बुनियाद रखी उसे आगे बढ़ाएंगे। इसमें आप सभी लोगों का साथ चाहिए। मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति के लोगों के लिए राज्य सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं की भी चर्चा की। भाजपा पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र में बैठे लोग यह देख लें कि कितनी बड़ी संख्या में लोग यहां मौजूद हैं।

वहीं, शनिवार को पटना में भाजपा के हुए कार्यक्रम किस तरह से फ्लॉप हुआ, इस पर भी खूब चुटकी ली। उन्होंने कहा कि पहले अनुसूचित जाति के लोगों के लिए कुछ नहीं होता था। लेकिन, उन्होंने हमने नीति बनाकर इस समाज के लोगों की मदद की है। हमने सभी वर्ग के हितों के लिए काम किया है। अगड़ा-पिछड़ा के साथ-साथ महिलाओं के लिए भी बहुत काम हुए हैं। आज कितनी बड़ी संख्या में महिलाएं आगे आ गई हैं। पहले महिलाएं घर की दहलीज से बाहर नहीं निकलती थीं, लेकिन अब परिस्थितयां बदली हैं। आज वह आगे आ रही हैं।

बिहार में आरक्षण के बढ़े दायरे पर भी बात की

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले वंचित समाज के लोग पढ़ते नहीं थे। इसके लिए विकास मित्र, टोला सेवक व तालीमी मरकज की व्यवस्था की गई। इनके मानदेय में बढ़ोतरी की गई। अगले साल भी वह विकास मित्रों के मानदेय को बढ़ाएंगे। मुख्यमंत्री ने जाति आधारित गणना के बाद अनुसूचित जाति व अन्य जातियों के लिए आरक्षण के बढ़े दायरे पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि हमलोगों ने बिहार में जाति आधारित गणना कराई। इसकी रिपोर्ट में यह बात आई

कि किस तरह से अनुसूचित जाति-जनजाति व अन्य वर्ग के लोगों की संख्या बढ़ी है।
उनकी बढ़ी आबादी के आधार पर उनके आरक्षण को बढ़ाया गया। अनुसूचित जाति के लोगों को पहले 16 प्रतिशत आरक्षण था, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है। अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को भी दो प्रतिशत बढ़ाया गया है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को भी बढ़ाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जाति आधारित गणना के क्रम में परिवारों का आर्थिक सर्वे भी कराया गया था।

प्रत्येक गरीब परिवार को देंगे दो-दो लाख रुपए
सीएम ने कहा कि हमलोगों ने तय किया है कि प्रत्येक गरीब परिवार को दो-दो लाख रुपए देंगे, ताकि वह कोई नया काम कर सके। इसके लिए दो लाख, 50 हजार करोड़ रुपए चाहिए। लक्ष्य यह है कि अगले पांच वर्षों के भीतर यह काम पूरा कर लिया जाए। अगर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिल जाता है, तो यह काम दो वर्षों में ही पूरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से यह कहा जाता है कि वह बिहार को मदद कर रही। लेकिन, स्थिति यह है कि योजनाओं का 40 प्रतिशत खर्च बिहार सरकार को करना पड़ता है। केंद्र की सरकार कुछ नहीं करती। केवल झूठा प्रचार-प्रसार करती है।

भीम संसद पर चिराग बोले- बिहार में दलितों पर अत्याचार हो रहा, इसका जवाब दें नीतीश
इधर, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और जमुई सांसद चिराग पासवान रविवार दोपहर दिल्ली से पटना पहुंचे। पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान चिराग ने जदयू द्वारा आयोजित भीम संसद पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और महागठबंधन की सरकार द्वारा भीम संसद का आयोजन किया गया है, यह एक छलावा मात्र है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दलितों के साथ हमेशा से छलावा करने का काम किया।

चिराग ने कहा कि भीम संसद में मुख्यमंत्री यह भी बताएं कि उनकी बिहार में दलितों पर अत्याचार हो रहा है। आए दिन दलितों की हत्या हो रही है। दलित की बेटियों के साथ दुष्कर्म हो रहा है। दलितों की गला रेतकर हत्या की जा रही है। क्या इन बातों का जवाब जदयू नेताओं के पास है? चिराग ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार ने विधानसभा में दलित मुख्यमंत्री का अपमान किया था। उन्होंने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल पूर्व मुख्यमंत्री के लिए किया, वह सबको पता है। ऐसे में भीम संसद का आयोजन छलावा मात्र है।

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