
चाईबासा : स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की गुवा स्थित राजाबुरु खदान में विगत पखवाड़े से काम ठप रहने के खिलाफ स्थानीय श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। विभिन्न श्रम संगठनों और प्रभावित कर्मचारियों ने गुवा में एक विशाल जनसभा आयोजित कर खदान परिचालन को अविलंब बहाल करने की हुंकार भरी। मजदूर प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि कुछ लोगों द्वारा अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए पूरे संयंत्र के कामकाज को बाधित किया गया है। यह किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं है। श्रमिकों का मानना है कि नियोजन या अन्य स्थानीय समस्याओं का समाधान संवाद और प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए, न कि उत्पादन को ठप करके।
500 से अधिक जिंदगियों पर संकट
खदान बंदी के कारण 100 से अधिक प्रत्यक्ष श्रमिकों सहित लगभग 500 परिजनों के समक्ष आजीविका और भुखमरी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सभा में वक्ताओं ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि किसी एक व्यक्ति या समूह की महत्वाकांक्षाओं की बलि पूरे श्रमिक वर्ग के हितों को नहीं चढ़ाया जा सकता। दैनिक मजदूरी पर आश्रित परिवारों का चूल्हा जलना अब दूभर हो गया है।
शीर्ष प्रबंधन से मुलाकात करेगा यूनियनों का साझा प्रतिनिधिमंडल
इस वृहद बैठक में क्रांतिकारी इस्पात मजदूर संघ, सीटू, बीएमएस, झारखंड मजदूर यूनियन तथा स्थानीय बेरोजगार संघ के पदाधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता झारखंड मजदूर यूनियन के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुखिया कपिलेश्वर डोंगो ने की।
सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सभी यूनियनों का एक साझा प्रतिनिधिमंडल जल्द ही सेल गुवा के शीर्ष प्रबंधन से मुलाकात करेगा। इस दौरान खदान को बिना किसी विलंब के चालू कराने हेतु एक औपचारिक मांग-पत्र सौंपा जाएगा। श्रमिक नेताओं ने दो टूक कहा कि वे जायज मांगों पर वार्ता के पक्षधर हैं, किंतु कामबंदी की आड़ में रोजी-रोटी छीनने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

