धनबाद। धनबाद जिले के झरिया फायर एरिया में जानमाल सुरक्षित नहीं है। जमीन के नीचे आग धधक रही है। ऊपर से उनकी सुरक्षा के लिए मुकम्मल व्यवस्था नहीं की जा रही है। लोग भय व दहशत के साए में रह रहे हैं।
बाघमारा प्रखंड के सोनारडीह टंडाबाड़ी में बुधवार की सुबह करीब छह बजे जोरदार आवाज के साथ एक बार फिर भू-धंसान की घटना घटी। इससे वहां भगदड़ की स्थिति बन गई। दहशत में लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
इस बार भी भू-धंसान के कारण सड़क में बड़ी दरार पड़ गई है। पीपल का एक पेड़ सहित चबूतरा करीब छह फीट से अधिक नीचे धंस गया। जबकि आसपास के करीब एक दर्जन आवास क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई घरों में दरारें आ गई हैं। ये घर रहने लायक नहीं बच गए हैं, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।
इससे पूर्व 31 मार्च को भू-धंसान में तीन लोगों की हो गई थी मौत
इससे पूर्व 31 मार्च को भू-धंसान की घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी। लोगों ने फोरलेन सड़क को जाम कर विरोध जताया था। अभी भी करीब 12 परिवार खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। यह पूरा इलाका झरिया फायर एरिया के तहत आता है।
बार- बार भू-धंसान एवं बीसीसीएल प्रबंधन तथा प्रशासन की अनदेखी प्रभावित परिवारों में आक्रोश भी देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बावजूद बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से अब तक पुनर्वास को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीण प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन से शीघ्र सुरक्षित पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
फायर एरिया में रहने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण (जेआरडीए) ने झरिया मास्टर प्लान के तहत योजना बनाई है, लेकिन जमीन स्तर पर इसका सही ढंग से अनुपालन नहीं हो रहा है। इससे लोग परेशान हैं।

