रांची : झारखंड के दुमका जिले में अवैध खनन से जुड़े मामलों में लापरवाही और पर्यवेक्षण में शिथिलता बरतने के आरोप में शिकारीपाड़ा की तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) अमृता कुमारी की दो वेतनवृद्धि रोक दी गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अनुमति के बाद इस संबंध में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने आदेश जारी किया है।
मामला वर्ष 2020 का है। दुमका के तत्कालीन उपायुक्त द्वारा सितंबर 2020 में अमृता कुमारी के खिलाफ आरोप पत्र राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजा गया था। इसकी प्रति कार्मिक विभाग को भी उपलब्ध कराई गई थी। आरोपों में जब्त किए गए 58 ट्रकों में से 42 ट्रकों के निकल जाने, अवैध बालू एवं पत्थर खनन से संबंधित मामलों में नियमित प्रतिवेदन नहीं भेजने, जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराने तथा अवैध खनन रोकथाम के कार्य में लापरवाही बरतने जैसी बातें शामिल थीं। इसके अलावा अवैध पत्थर खनन के दौरान मजदूर की मृत्यु के संबंध में स्पष्टीकरण समर्पित नहीं करने पत्रों में बैकडेटिंग करने और अवैध खनन से संबंधित जांच प्रतिवेदन समर्पित नहीं करने संबंधित आरोप प्रतिवेदित किए गए थे।
मामले में अमृता कुमारी से स्पष्टीकरण और बाद में द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब भी मांगा गया था। उन्होंने अपने जवाब में कहा था कि उपायुक्त स्तर से उन्हें आरोपमुक्त करने की अनुशंसा की गई थी। हालांकि सरकार की समीक्षा में पाया गया कि अवैध खनन की निगरानी और रोकथाम के कार्य में अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती गई तथा पर्यवेक्षण में शिथिलता रही। समीक्षोपरांत सरकार ने उनके जवाब को अस्वीकार करते हुए झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के नियम 14 (iv) के तहत दो वेतन वृद्धि पर रोक लगाने का दंड अधिरोपित किया है।
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