
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में हुए भ्रष्टाचार अब एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच चुका है। सीआईडी द्वारा की जा रही गहन जांच में एक के बाद एक कई सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। इसने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में यह पूरी तरह साफ होता दिख रहा है कि किस तरह योग्य और मेहनती युवाओं के हक पर डाका डालकर पैसों के दम पर नौकरियां बेची जा रही थीं।
टीडीपीएल के कर्मियों ने ही दिया फर्जीवाड़े को अंजाम
जांच एजेंसी के हाथ लगे बयानों और साक्ष्यों के अनुसार, परीक्षा कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के कर्मियों ने ही इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। गिरफ्तार तकनीकी कर्मचारी उस्मान और कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह ने सीआईडी के समक्ष स्वीकार किया है कि ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) शीट और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की जाती थी।
जिन अभ्यर्थियों से सेटिंग होती थी, उन्हें परीक्षा में उत्तर पुस्तिका में गोले खाली छोड़ने की हिदायत दी जाती थी। बाद में स्कैनिंग और प्रोसेसिंग के दौरान एजेंसी के कर्मचारी उन खाली गोलों में सही उत्तर भर देते थे। यही नहीं, मुख्य परीक्षा के उत्तरों को फर्जी तरीके से लिखवाने और प्रोफेसरों की मदद से अंक बढ़ाने का खेल भी बैकएंड से खेला जाता था।
हर परीक्षा का तय था रेट
सीआईडी की पूछताछ में सामने आया है कि इस भ्रष्टाचार का जाल केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं था। फॉरेस्ट रेंज अफसर (FRO), असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF), 14वीं जेपीएससी और जेपीएससी बैकलॉग जैसी कई प्रमुख परीक्षाओं में अभ्यर्थियों का चयन कराया गया। एफआरओ (FRO) के एक पद के लिए 20 से 25 लाख रुपये और एसीएफ (ACF) के पद के लिए 30 से 35 लाख रुपये तक वसूले गए।
एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और उसके नेटवर्क ने मिलकर केवल 20 अभ्यर्थियों से ही करीब 5.80 करोड़ रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। परीक्षा की तैयारी और मुख्य परीक्षा के फर्जी उत्तर लिखवाने के लिए रांची के पॉश इलाके हरिओम टावर में बाकायदा किराए पर फ्लैट लिया गया था, जहां बाहर से लोग बुलाकर उत्तर लिखवाए जाते थे।
अफसरशाही से लेकर दलालों का मजबूत नेटवर्क
यह पूरा फर्जीवाड़ा केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं था। इसके तार ऊंचे प्रशासनिक गलियारों तक जुड़े हुए थे। सीआईडी के सामने आए बयानों में जेपीएससी की परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनीष रंजन तक के नामों का जिक्र आया है। जांच में यह बात सामने आई है कि आयोग के अधिकारियों, दलालों, तकनीकी कर्मचारियों और मुख्य सचिव आवास के कंप्यूटर ऑपरेटर तक की इस पूरे सिंडिकेट में मिलीभगत थी।
सीआईडी साक्ष्यों का कर रही सत्यापन
फिलहाल सीआईडी आरोपियों के बयानों, पैसों के डिजिटल व नकद लेन-देन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और ओएमआर शीट के डिजिटल फॉरेंसिक डेटा का मिलान कर रही है। जिस तरह से सिस्टम में बैठकर योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया, उसने पूरे राज्य में आक्रोश का माहौल बना दिया है। सीआईडी अब इस गिरोह के बाकी बचे प्यादों के खिलाफ सुबूत जुटाने में लगी है।
Read Also- Jamshedpur News : एमजीएम मेडिकल कॉलेज हॉस्टल से चोरी लैपटॉप बरामद, आरोपी गिरफ्तार

