
Jamshedpur : जमशेदपुर के सिदगोड़ा में टाटा स्टील ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। टाटा स्टील ने प्लाट संख्या 2763 पर हुए अतिक्रमण को बुल्डोजर लगाकर हटा दिया है। इस प्लाट पर गमला वगैरह रखकर बेचा जा रहा था। झोपड़ी भी बनाई गई थी। इसे तोड़ दिया गया।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले जमकर हंगामा हुआ। जिन लोगों का प्लाट पर कब्जा था उनका कहना था कि बिना नोटिस जारी किए ही टाटा स्टील ने यह कार्रवाई की है। पुलिस कर्मियों की मौजूदगी के चलते ज्यादा बवाल नहीं हो पाया।
इस प्लाट पर मनोहर सिंह का कब्जा था। उनका कहना है कि वह 60 साल से अधिक वर्ष से इस पर काबिज थे। साल 2006 में यह प्लाट प्रभाकर राव पूरी और अरुण सिंह को बेच दिया था और कब्जा ट्रांसफर कर दिया था। जमीन की रजिस्ट्री नहीं हुई थी।
साल 2009 में एसडीओ कोर्ट में हुआ था केस
अरुण सिंह के अधिवक्ता ने बताया कि साल 2009 में टाटा स्टील ने एसडीओ कोर्ट में केस किया था। एसडीओ कोर्ट की तरफ से जांच कराई गई। अधिवक्ता का कहना है कि जांच में सामने आया कि यह जमीन प्रभाकर और अरुण सिंह के कब्जे में है। इसके बाद धारा 144 का जो आदेश हुआ वह मनोहर सिंह के पक्ष में और टाटा स्टील के विरुद्ध था। मनोहर सिंह के अधिवक्ता ने आगे बताया कि टाटा स्टील ने इस आदेश के विरुद्ध डीसी कोर्ट में अपील की। वहां आवेदन देकर दोबारा जांच कराने की मांग की।
तत्कालीन डीसी के आदेश पर फिर से जांच की गई और जांच रिपोर्ट में यही आया कि इस प्लाट पर मनोहर सिंह का कब्जा है।
अधिवक्ता ने बताया कि इस आदेश के 90 दिन के अंदर अगली कोर्ट में अपील होनी चाहिए थी। लेकिन, टाटा स्टील ऐसा नहीं कर सकी। क्योंकि उसके पास कोई कागजात नहीं था।
20 अगस्त को है कोर्ट में टाइटल सूट की तारीख
मनोहर सिंह ने सिविल कोर्ट में टाइटल सूट दायर किया है। और मांग की है कि जब इस प्लाट पर उनका कब्जा है तो उनका मलिकाना हक भी इस पर होना चाहिए। टाइटल सूट की तारीख 20 अगस्त निश्चित है। लेकिन, इसके पहले ही टाटा स्टील ने जिला प्रशासन से मिलकर प्लाट से उनका कब्जा हटा दिया है। अधिवक्ता ने कहा कि जब केस कोर्ट में विचाराधीन है, तो टाटा स्टील या जिला प्रशासन कोर्ट से बड़ा कैसे हो गया। उनका कहना है कि कोर्ट में फैसला हो जाता, इसके बाद कार्रवाई होती तो ठीक था। अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने अतिक्रमण हटाओ अभियान के मजिस्ट्रेट बनाए गए सीओ से भी कहा की कार्रवाई रोक दें।
प्लॉट नंबर 2762 पर क्यों नहीं हटाया जा रहा अतिक्रमण
लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं मानी। अधिवक्ता ने बताया कि एसडीओ ने अतिक्रमण हटाने का आदेश प्लाट नंबर 2762 और प्लाट नंबर 2763 पर किया है। लेकिन, कार्रवाई सिर्फ 2763 पर ही की जा रही है। उन्होंने कहा कि 2762 पर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स बनी हैं। लेकिन, उधर तोड़फोड़ नहीं की जा रही है। एसडीओ ने कहा कि वह इस कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे।
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