
Jamshedpur : टाटा स्टील की चीफ एथिक्स काउंसलर सोनी सिन्हा ने कहा है कि बदलते वैश्विक कारोबारी परिवेश में एथिक्स (नैतिकता) अब केवल कानूनों और नियमों के अनुपालन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह व्यवसाय की रणनीति, नवाचार, तकनीक के जिम्मेदार उपयोग और दीर्घकालिक विकास का प्रमुख आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन की सफलता अब केवल उसके व्यावसायिक परिणामों से नहीं, बल्कि इस बात से भी आंकी जाती है कि वह अपने लक्ष्य किस प्रकार प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और बढ़ती सार्वजनिक जवाबदेही के दौर में डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, जवाबदेही और जिम्मेदार एआई जैसे विषय व्यवसायों के सामने नई नैतिक चुनौतियां बनकर उभरे हैं। आज किसी भी कंपनी की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा उसके नैतिक आचरण पर निर्भरकरती है। अवसाद और चिंता के कारण प्रतिवर्ष लगभग 12 अरब कार्यदिवस प्रभावित
सोनी सिन्हा ने कहा कि निवेशकों, ग्राहकों, नियामक संस्थाओं और समाज की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। पर्यावरण, सामाजिक उत्तरदायित्व और सुशासन (ESG) से जुड़े मानकों के साथ-साथ भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (BRSR) व्यवस्था भी कंपनियों को अपनी व्यावसायिक रणनीति में नैतिक निर्णयों को शामिल करने के लिए प्रेरित कर रही है।
उन्होंने कार्यस्थल पर सुरक्षित और समावेशी वातावरण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भेदभाव, अत्यधिक कार्यभार, नौकरी की असुरक्षा और उत्पीड़न जैसी परिस्थितियां कर्मचारियों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। वैश्विक स्तर पर अवसाद और चिंता के कारण प्रतिवर्ष लगभग 12 अरब कार्यदिवस प्रभावित होते हैं,जिससे विश्व अर्थव्यवस्था को करीब एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की उत्पादकता का नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल का निर्माण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आज व्यवसायों से केवल अपने संगठन तक ही नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन में मानवाधिकारों के सम्मान, जिम्मेदार सोर्सिंग और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपेक्षा की जाती है। संयुक्त राष्ट्र के बिजनेस एंड ह्यूमन राइट्स संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांत भी जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण को वैश्विक मानक के रूप में स्थापित करते हैं। कंपनी वर्ष 2045 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य करेगी हासिल
टाटा स्टील की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए सोनी सिन्हा ने कहा कि जेआरडी टाटा के नैतिक मूल्यों से प्रेरित होकर कंपनी वर्ष 2045 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की दशा में कार्य कर रही है। इसके साथ ही जिम्मेदार कच्चे माल के उपयोग और पर्यावरण-अनुकूल इस्पात उत्पादन के लिए HIsarna और EASyMelt जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के विकास पर भी लगातार काम किया जा रहा है
उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों में संचालन के बावजूद टाटा स्टील की साझा आचार संहिता संगठन के प्रत्येक निर्णय को सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही के मूल्यों से जोड़ती है। कंपनी की ‘स्पीक-अप’ संस्कृति कर्मचारियों को बिना किसी भय के अपनी बात रखने, प्रश्न पूछने और नैतिक मूल्यों के अनुरूप निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करती है।
सोनी सिन्हा ने कहा कि “वन कोड, वन कमिटमेंट, वन टाटा – यूनिफाइड बाय द कोड” केवल एथिक्स मंथ की थीम नहीं, बल्कि टाटा समूह की साझा कार्य संस्कृति और नैतिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो सभी व्यवसायों और कर्मचारियों को एक समान मूल्यों के साथ जोड़ता है।

