
Jamshedpur : कोई दस साल से सेवा दे रहा था तो किसी के 15 साल पूरे हो चुके थे। अचानक उन्हें पता चला कि उनका अनुभाग ही बंद कर दिया गया है। अब उन्हें अपने व अपने परिवार के भविष्य को लेकर चिंता सता रही है। मामला जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय का है। इंटरमीडिएट को विश्ववद्यालय से अलग किए जाने के बाद यहां पूर्व से कार्यरत शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की चिंता बढ़ती जा रही है। उनका समाधान नहीं हो रहा है। मंगलवार को इस विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के सामने मुखर होकर यह मुद्दा उठाया गया। झारखंड विश्वविद्यालय एवं महविद्यालय कर्मचारी महासंघ की ओर से राज्यपाल को इससे संबंधित ज्ञापन सौंपा गया।
राज्यपाल से मामले में निर्देश जारी करने का किया आग्रह
झारखंड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के महामंत्री विश्वम्भर यादव की ओर से जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के शिक्षकेत्तर कर्मचारियों से संबंधित विभिन्न लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण के लिए माननीय राज्यपाल-सह-कुलाधिपति महोदय को ज्ञापन देकर आवश्यक हस्तक्षेप एवं विश्वविद्यालय प्रशासन को उचित दिशा-निर्देश देने का आग्रह किया गया।
रोजगार व भविष्य की चिंता
महासंघ के महामंत्री विश्वंभर यादव ने कहा कि जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट अनुभाग में कार्यरत शिक्षकेत्तर कर्मचारी पिछले लगभग 10-15 वर्षों से निष्ठा एवं समर्पण के साथ विश्वविद्यालय की सेवा करते आ रहे हैं। इंटरमीडिएट अनुभाग के बंद होने के बाद इन कर्मचारियों के समक्ष रोजगार एवं भविष्य की गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में कर्मचारियों की ओर से 21 अप्रैल 2026 को कुलसचिव और 25 मई 2026 को कुलपति को आवेदन दिया गया था। इसके बाद 29 जुलाई 2026 को कुलपति अनुस्मारक भी दिया जा चुका है। अनुस्मारक की प्रतिलिपि कुलसचिव व प्रॉक्टर को भी प्रेषित की गई है। महासंघ ने उनकी दीर्घकालीन सेवा, अनुभव एवं समर्पण को देखते हुए विश्वविद्यालय के अन्य उपयुक्त अनुभागों/कार्यालयों में उनकी सेवाओं के समायोजन/समावेशन की मांग की है।
कुलपति को निर्देश जारी करने की मांग
महासंघ ने माननीय राज्यपाल-सह-कुलाधिपति महोदय से विशेष रूप से वित्त विभाग के आदेश संख्या 478 के गैर-कार्यान्वयन के मामले में आवश्यक हस्तक्षेप करते हुए जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की कुलपति को उक्त आदेश के तत्काल अनुपालन सहित उपर्युक्त सभी कर्मचारीहित संबंधी मामलों के शीघ्र निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश प्रदान करने का आग्रह किया है।
महासंघ ने ज्ञापन के माध्यम से उठाईं मांगें—
1. ACP/MACP का लाभ: पात्र शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को नियमानुसार ACP/MACP का लाभ प्रदान करते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन किया जाए।
2. पद-आधारित जवाबदेही: पत्रांक 899, दिनांक 29.04.2026 के माध्यम से पदों के पुनर्गठन/पुनर्संरचना के बाद संबंधित शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को पुनर्संरचित पदों के अनुरूप पदस्थापन एवं दायित्व प्रदान किया जाए, ताकि पद एवं कार्य के अनुरूप स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हो तथा विश्वविद्यालय का संचालन विधिसम्मत, पारदर्शी एवं उत्तरदायी ढंग से हो सके।
3. आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के पारिश्रमिक संबंधी वित्त विभाग के आदेश का अनुपालन: महासंघ ने गंभीर चिंता व्यक्त की कि झारखण्ड सरकार के वित्त विभाग के आदेश संख्या 478, दिनांक 17.02.2026 के बावजूद उक्त आदेश का जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में कार्यान्वयन नहीं किया जा रहा है। इसके कारण निर्धारित पारिश्रमिक का लाभ आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नहीं मिल पा रहा है तथा वर्तमान व्यवस्था से वेंडरों/सेवा प्रदाताओं को आर्थिक लाभ प्राप्त होने की स्थिति बनी हुई है। महासंघ ने मांग की है कि वित्त विभाग के उक्त आदेश का तत्काल एवं अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करते हुए आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के निर्धारित पारिश्रमिक एवं अधिकारों की रक्षा की जाए।

