गिरिडीह : झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड से अफ्रीकी देश नाइजर गए प्रवासी मजदूरों के अपहरण का मामला आठ माह बाद भी रहस्य बना हुआ है। हथियारबंद अपराधियों द्वारा अगवा किए गए इन मजदूरों का अब तक कोई ठोस सुराग नहीं लग पाया है, जिससे उनके परिजनों की चिंता और प्रशासन की चुनौती दोनों बढ़ती जा रही हैं।
नाइजर में अपहृत बगोदर के प्रवासी मजदूरों का मामला
जानकारी के अनुसार, 25 अप्रैल 2025 को नाइजर में कार्यरत झारखंड के पांच प्रवासी मजदूरों का हथियारबंद अपराधियों ने अपहरण कर लिया था। अपहृत मजदूरों में बगोदर प्रखंड के दोंदलो गांव निवासी संजय महतो, फलजीत महतो, राजू महतो, चन्द्रिका महतो तथा मुंडरो गांव निवासी उत्तम महतो शामिल हैं। सभी मजदूर नाइजर में कल्पतरू कंपनी के अंतर्गत टावर लाइन प्रोजेक्ट में कार्यरत थे।
जनवरी 2024 में रोजगार की तलाश में गए थे नाइजर
परिजनों के अनुसार, रोजगार की तलाश में ये सभी मजदूर जनवरी 2024 में नाइजर गए थे। प्रारंभिक महीनों में वे नियमित रूप से घर संपर्क में थे और कामकाज की जानकारी साझा कर रहे थे। लेकिन अप्रैल 2025 में अचानक उनके अपहरण की सूचना मिलने के बाद से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
आठ महीने बाद भी नहीं मिला कोई ठोस संकेत
अपहरण के आठ महीने बीत जाने के बावजूद न तो नाइजर प्रशासन और न ही भारतीय दूतावास की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने आ सकी है। परिजन लगातार स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और केंद्र सरकार से गुहार लगा रहे हैं, ताकि उनके परिजनों को सुरक्षित वापस लाया जा सके।
परिजनों की बढ़ती चिंता, सरकार से हस्तक्षेप की मांग
दोंदलो और मुंडरो गांवों में अपहृत मजदूरों के परिवार भय और अनिश्चितता के साए में जीवन बिता रहे हैं। परिजनों का कहना है कि इतने लंबे समय तक कोई सूचना न मिलना उनकी पीड़ा को और गहरा कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से इस मामले में कूटनीतिक स्तर पर ठोस कार्रवाई की मांग की है।
अफ्रीका में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल
यह घटना अफ्रीकी देशों में कार्यरत भारतीय प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। खासकर नाइजर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कार्य कर रहे भारतीय मजदूरों के लिए सुरक्षा इंतजाम और संकट के समय त्वरित सहायता की आवश्यकता एक बार फिर सामने आई है।
प्रशासनिक प्रयास जारी, लेकिन नतीजा शून्य
स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन द्वारा मामले को राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचाया गया है। हालांकि, अब तक किसी ठोस परिणाम की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समन्वय और दूतावास स्तर पर सक्रिय हस्तक्षेप के बिना इस तरह के मामलों में समाधान कठिन होता है।

