नई दिल्ली : नवनियुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बुधवार को कार्यालय में पदभार संभाल लिया, जबकि कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया को लेकर विरोध जताया गया है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया बेहद जल्दबाजी में की गई। गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक चयन समिति द्वारा नियुक्त किया गया। इस समिति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी सदस्य के रूप में शामिल थे।
ज्ञानेश कुमार ऐसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) हैं, जिन्हें नए कानून के तहत नियुक्त किया गया है और उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक होगा, जो अगले लोकसभा चुनाव की तारीखों के एलान से कुछ दिन पहले समाप्त होगा।
सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्तियों के खिलाफ 2023 के कानून के तहत दायर याचिकाओं पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करेगा। कुमार की नियुक्ति उस समय की गई, जब कांग्रेस ने सरकार से नया CEC नियुक्त करने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट द्वारा चयन समिति की संरचना पर सुनवाई पूरी होने तक स्थगित करने की मांग की थी।
राहुल गांधी ने नोट लिख जताई असहमति
गांधी ने कहा कि उन्होंने समिति की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और शाह के सामने एक असहमतिपूर्ण नोट पेश किया। राहुल ने नोट में लिखा कि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता, जो कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त हो, का सबसे मौलिक पहलू चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन की प्रक्रिया है।
राष्ट्र निर्माण के लिए पहला कदम मतदान है : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
जिम्मेदारी संभालने के बाद, नव-नियुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कहते हैं, ‘राष्ट्र निर्माण के लिए पहला कदम मतदान है। इसलिए, भारत का हर नागरिक जिसने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, उसे मतदाता बनना चाहिए और हमेशा मतदान करना चाहिए। भारत के संविधान, चुनावी कानूनों, नियमों और उसमें जारी निर्देशों के अनुसार, भारत का चुनाव आयोग मतदाताओं के साथ था, है और हमेशा रहेगा’।

