Jamshedpur : कहते हैं कि किसी परिस्थिति में धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। यह बात सच साबित करके दिखाई है मानगो के पोस्ट ऑफिस रोड की रहने वाली महिला कविता सिंह ने। कविता सिंह का जब 2013 में उनके पति से अचानक साथ छूटा तो उनके सामने विकट आर्थिक परिस्थितियां खड़ी हो गईं। कविता सिंह पर खुद के अलावा दो बच्चों की भी जिम्मेदारी आ गई। तब कविता सिंह हाउसवाइफ थीं। उनके आगे पीछे कोई नहीं था, जो ऐसे विकट हालात में उनकी मदद करता। लेकिन कविता सिंह ने हिम्मत नहीं हारी।
साल 2000 में जब कविता सिंह की शादी हुई थी तब वह मात्र ग्रेजुएट थीं। पति का साथ छुटने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई करने की ठानी और घर में जो बची खुची जमा-पूंजी को अपनी पढ़ाई में लगाया। कविता सिंह ने साल 2014 में बीएड किया। वह आठ-आठ घंटे पढ़ाई करती थीं। इसके बाद उन्होंने यूजीसी-नेट भी निकाल लिया। यूजीसी नेट में उन्हें 70% अंक मिले थे। काफी संघर्ष और मशक्कत के बाद आखिर उन्हें सफलता मिली और वह एक हाईस्कूल में टीचर हो गईं। आज उनकी तैनाती घाटशिला के उत्क्रमित हाई स्कूल बरडी में है। वह यहां की प्रिंसिपल इंचार्ज हैं।
बेंगलुरु के क्राइस्ट यूनिवर्सिटी में कराया था बेटी का दाखिला
अपनी पढ़ाई के साथ ही उन्होंने बच्चों की पढ़ाई पर भी ध्यान दिया। उन्होंने अपनी बेटी आकांक्षा सिंह का दाखिला बेंगलुरु के क्राइस्ट यूनिवर्सिटी में कराया। यहां से आकांक्षा सिंह ने बीबीए की पढ़ाई पूरी की और अब उनकी जर्मनी के एक ग्लोबल बैंक डाइट में जॉब लग गई है। कविता सिंह बताती हैं कि जब उनकी बेटी की इस बैंक में जॉब लगी तो उन्हें काफी प्रसन्नता मिली कि उनकी मेहनत रंग लाई है। बेटा आयुष राज शेन इंटरनेशनल स्कूल में 12वीं की पढ़ाई कर रहा है।
बिजनेस में घाटे के बाद डिप्रेशन में रहते थे कविता के पति
कविता सिंह बताती हैं कि उनके पति का बिजनेस था। बिजनेस में काफी घाटा हो गया था। इसके चलते वह काफी डिप्रेशन में थे। अचानक वह कहां चले गए या उनके साथ क्या घटना घटित हुई। इसका कुछ पता नहीं चल पाया। आज तक उनका कुछ पता नहीं चला कि उनके साथ क्या हुआ था।

