Ranchi : झारखंड में अवैध वेतन निकासी के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। हाल ही में सामने आए घोटालों के बाद यह साफ हुआ कि मौजूदा सिस्टम में तकनीकी खामियां हैं, जिनका फायदा उठाकर फर्जी तरीके से वेतन निकाला जा रहा था।
वित्त विभाग और HRMS सिस्टम होंगे एकीकृत
वर्तमान में राज्य में वेतन भुगतान के लिए वित्त विभाग का अलग सॉफ्टवेयर और कर्मचारियों के रिकॉर्ड के लिए कार्मिक विभाग का HRMS (ह्युमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) उपयोग में है। दोनों सिस्टम आपस में जुड़े नहीं होने के कारण कई गड़बड़ियां सामने आईं।सबसे बड़ी समस्या यह रही कि जब कोई कर्मचारी सेवानिवृत्त होता था तो एचआरएमएस से उसका डेटा हट जाता था, लेकिन इसकी जानकारी वित्त विभाग तक नहीं पहुंचती थी। इसी खामी का फायदा उठाकर कुछ मामलों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम पर महीनों तक वेतन निकासी होती रही।
नई व्यवस्था से पूरी तरह लगेगी रोक
अब राज्य सरकार वित्त विभाग, ट्रेजरी और एचआरएमएस सिस्टम को एकीकृत करने की योजना पर काम कर रही है। अधिकारियों को इस दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। नई प्रणाली लागू होने के बाद किसी भी कर्मचारी की स्थिति में बदलाव तुरंत सभी विभागों में अपडेट हो जाएगा, जिससे फर्जी भुगतान पर पूरी तरह रोक लगने की उम्मीद है।सरकार का दावा है कि इस एकीकृत सिस्टम के लागू होने के बाद अवैध वेतन निकासी जैसी घटनाओं पर स्वतः ही नियंत्रण स्थापित हो जाएगा।

