
राज्य के करीब पौने दो लाख कर्मचारियों को मिलेगा आर्थिक सुरक्षा का लाभ, बैंकों से पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए भी योजना बनाने की अपील
रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैंकों से सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था से जुड़े मानकी-मुंडा, प्रधान और अन्य लोगों को भी आर्थिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो सरकार के अभिन्न अंग के रूप में काम करते हैं, लेकिन उन्हें नियमित वेतन या दूसरी आर्थिक सुविधाएं नहीं मिलती हैं। बैंकों को ऐसे लोगों के लिए भी विशेष योजनाएं तैयार करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री बुधवार को प्रोजेक्ट भवन में झारखंड सरकार और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बीच हुए समझौता (एमओयू) कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस समझौते के तहत राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा और विपत्ति के समय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की गयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विभिन्न बैंकों के साथ हुए ऐसे समझौतों से करीब पौने दो लाख कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने यूनियन बैंक के अधिकारियों को इस पहल के लिए धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि किसी भी कर्मचारी या नागरिक के जीवन में संकट आने पर उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल सके। नौकरी करने वाले हों या सामान्य जीवन जीने वाले लोग, सभी के लिए ऐसी योजनाओं की जरूरत है, जिससे उनके और उनके परिवार का भविष्य सुरक्षित रह सके। सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। केवल एक बार में सारी परिस्थितियां नहीं बदली जा सकतीं, लेकिन छोटे-छोटे प्रयासों से लोगों को राहत दी जा सकती है।
मानकी-मुंडा और पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोगों पर भी ध्यान दें बैंक
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आदिवासी बहुल राज्य है। यहां मानकी-मुंडा, बैरन, प्रधान और मुखिया जैसी पारंपरिक व्यवस्थाएं आज भी सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोग गांवों में सामाजिक कार्यों का संचालन करते हैं। राज्य की अलग पहचान और व्यवस्था को बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे लोगों के लिए भी बैंक आर्थिक सुरक्षा की योजनाएं तैयार करें।
उन्होंने कहा कि अभी बैंकों के साथ जो समझौते हो रहे हैं, उनका लाभ मुख्य रूप से उन लोगों को मिलेगा, जिनके खाते में सरकार की ओर से वेतन जाता है। लेकिन ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है, जो सरकार के साथ जुड़कर काम करते हैं और जिन्हें नियमित वेतन नहीं मिलता। बैंकों को इस वर्ग के बारे में भी सोचना चाहिए। मुख्यमंत्री ने महिला सम्मान योजना की लाभुक महिलाओं और गरीब युवाओं को भी बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने की जरूरत बतायी।
हर घर और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करना लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि राज्य के हर घर और हर परिवार तक आर्थिक सुरक्षा पहुंचे। महिला सम्मान योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना लगातार तीन वर्षों से बिना रुके ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं तक पहुंच रही है। छोटी-छोटी योजनाएं भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकती हैं और लोगों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
उन्होंने बैंकों से राज्य की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में सहयोग बढ़ाने की अपील की। कहा कि राज्य में कई बैंक काम कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बैंकिंग सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत है। लोगों को अगर बैंकों से सहयोग नहीं मिलेगा, तो उनका भरोसा भी कमजोर होगा। इसलिए बैंकों को स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों को समझते हुए आगे आना चाहिए।
कार्यक्रम में मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, वित्त सचिव प्रशांत कुमार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जोनल हेड कुनाल अग्नानी सहित बैंक के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और बैंकों के बीच यह पहल राज्य के लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

