
रांची : डुमरी के जेएलकेएम विधायक जयराम महतो और धनबाद के बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच फोन पर हुई तीखी बहस का मामला अब झारखंड की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। यह विवाद सिर्फ दो लोगों के आपसी हॉट-टॉक तक सीमित नहीं रहा। इसमें पुलिस एसोसिएशन की कड़क चेतावनी और पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का बयान आने के बाद मामला और गरमा गया है।
एसोसिएशन ने दिया अल्टीमेटम
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने विधायक जयराम महतो के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रशासन को पांच दिनों का अल्टीमेटम दिया है। एसोसिएशन के केंद्रीय अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू के अनुसार, विधायक जयराम महतो पर आरोप है कि उन्होंने थाना प्रभारी को न केवल फोन पर धमकी दी, बल्कि देर रात अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचकर बदसलूकी की।
इस घटना को लेकर बरवाअड्डा थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत जयराम महतो और 10 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है।

पुलिस एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि 5 दिनों में आरोपी विधायक की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो पूरे राज्य के पुलिसकर्मी काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे और सामूहिक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। एसोसिएशन का यह भी कहना है कि विधायक लगातार सोशल मीडिया पर पुलिस के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देकर माहौल बिगाड़ रहे हैं।
मरांडी ने एसोसिएशन के आचरण पर खड़े किए सवाल
मामले में एंट्री लेते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जयराम महतो का पक्ष लिया है और पुलिस एसोसिएशन के आचरण पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर पुलिस एसोसिएशन से तीखे सवाल किए हैं।
उन्होंने पूछा है कि मर्यादा का दोहरा पैमाना क्यों? बातचीत में शिष्टाचार जरूरी है, लेकिन क्या मर्यादा की पूरी जिम्मेदारी केवल जनप्रतिनिधियों की है? जब आम नागरिकों के साथ पुलिस की गाली-गलौज और अभद्रता की शिकायतें आती हैं, तब एसोसिएशन चुप क्यों रहता है?
उन्होंने कहा कि बिना अनुमति किसी के फोन कॉल रिकॉर्ड करके उसे वायरल करना निजता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। क्या कानून और गोपनीयता के नियम पुलिसकर्मियों पर लागू नहीं होते? मरांडी ने बोकारो के चास थाना प्रभारी के वायरल ऑडियो का हवाला देते हुए कहा कि वहां कार्रवाई करने के बजाय आरोपी पुलिस अधिकारियों को ढाल दी गई थी।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठते सवाल
बाबूलाल मरांडी ने साफ कहा कि थानों में आम जनता के साथ होने वाला खराब व्यवहार किसी से छिपा नहीं है। अगर आज एक जनप्रतिनिधि और थाना प्रभारी के बीच विवाद इस हद तक बढ़ रहा है, तो यह हमारी पुलिसिंग व्यवस्था और कार्यशैली पर बहुत बड़ा सवालिया निशान है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ऐसे मामलों में केवल विभागीय निलंबन का नाटक बंद कर नियम के तहत सख्त प्राथमिकी और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब यह पूरी बहस केवल एक फोन कॉल तक सीमित न रहकर थानों में जनता से व्यवहार, पुलिस की जवाबदेही और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों के बड़े सवाल में तब्दील हो गई है।
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