Jamshedpur (Jharkhand) : जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी की स्थिति अराजक हो गई है। विश्वविद्यालय में काम कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मचारी भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। इन कर्मचारियों को चार महीने का वेतन नहीं मिला है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन कर्मचारियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि जुलाई से अब तक का भुगतान नहीं हुआ है।
क्या है वजह?
यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर इलेक्ट्रीशियन व तृतीय और चतुर्थ वर्ग के विभिन्न पदों पर कार्यरत ऐसे करीब 150 कर्मचारी हैं, जो एजेंसी के माध्यम से यहां काम करते हैं। करीब चार महीने पहले एजेंसी का कांट्रेक्ट खत्म हो गया था। कांट्रेक्ट खत्म होने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन कर्मियों को अपने अधीन रख लिया। उसके बाद से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनकी ओर से बार-बार वेतन की मांग की गई। हर बार यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कहा गया कि अभी फंड उपलब्ध नहीं हुआ है।
एजेंसी से उम्मीद, चार महीने के वेतन पर संशय
इस तरह चार महीने बीत जाने के बाद पिछले महीने पुनः उसी एजेंसी (एवरग्रीन) को कांट्रेक्ट मिल गया है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि संभवतः दिसंबर में एक महीने का वेतन मिलेगा। लेकिन, चार महीने का वेतन कब मिलेगा। मिलेगा भी या नहीं, इसे लेकर कर्मचारियों में संशय की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
क्या हो सकती है वजह?
जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय की ओर से अधिकांश संविदा कर्मचारियों को एजेंसी के जरिए ही भुगतान किया जाता है। कुछ कर्मचारियों को विश्वविद्यालय अपने स्तर से भुगतान करता है। यूनिवर्सिटी में स्थाई कुलपति नहीं होने से कोई निर्णय नहीं हो पा रहा। यूनिवर्सिटी प्रभारी कुलपति के भरोसे चल रही है। प्रभारी कुलपति के पास कोई नीतिगत अथवा वित्तीय निर्णय लेने का अधिकार नहीं होता है। उन्हें राजभवन की अनुमति से ऐसे कार्यों का संपादन करना होता है। इस बीच कर्मचारियों की स्थिति दयनीय हो गई है।
दो बार राजभवन को भेजा जा चुका है पत्र : प्रवक्ता
यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता डॉ. सुधीर कुमार साहू ने बताया कि उन्हें इस संबंध में कोई खास जानकारी नहीं है। संभवतः प्रभारी कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन भुगतान के संबंध में दो बार राजभवन को पत्र लिखा है। अभी तक पत्र का कोई जवाब आया या नहीं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

