
रांची: राजधानी रांची में अपनी जमीन का दाखिल-खारिज कराने का सपना देख रहे लोगों की राह आसान होने का नाम नहीं ले रही है। सरकारी पोर्टल झारभूमि की तकनीकी खामियों ने जमीन मालिकों का सिरदर्द बढ़ा दिया है। सॉफ्टवेयर में संपादन का विकल्प अचानक हट जाने से एमएस प्लॉट से जुड़े हजारों मामले अधर में लटक गए हैं। जनता की इस बढ़ती परेशानी और प्रशासनिक सुस्ती पर अब विभागीय मंत्री दीपक बिरुआ ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ लहजे में पांच दिनों के भीतर पूरे मामले पर जवाब और रिपोर्ट तलब की है।
अंचलों में अटकीं फाइलें, जनता परेशान
रांची के शहर अंचल सहित कई इलाकों में म्यूटेशन के आवेदनों का ढेर लग गया है। स्थिति इतनी खराब है कि केवल शहर अंचल में ही 600 से अधिक दाखिल-खारिज के मामले महीनों से पेंडिंग हैं। अंचल कार्यालय के कर्मचारियों का कहना है कि वे चाहकर भी इन फाइलों को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। सॉफ्टवेयर में जरूरी सुधार करने का ऑप्शन न होने की वजह से सिस्टम पूरी तरह लाचार दिख रहा है। कई लोग दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
अधिकारियों की गुहार पर जागे मंत्री
इस बड़ी समस्या से राहत पाने के लिए कई अंचल अधिकारियों (सीओ) ने उपायुक्त के जरिए सीधे राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग को पत्र भेजा। उन्होंने मांग की कि पोर्टल पर एडिट का विकल्प जल्द से जल्द दोबारा शुरू किया जाए ताकि पेंडिंग मामलों का निपटारा तेजी से हो सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री दीपक बिरुआ ने इस पर तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट स्तर पर आ रही तकनीकी रुकावटों की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है। मंत्री ने विभागीय सचिव से बात कर साफ कर दिया है कि पांच दिनों के अंदर मामले का समाधान खोजकर लिखित रिपोर्ट सौंपी जाए।

