रांची : झारखंड में बढ़ती गर्मी और संभावित जल संकट को देखते हुए मुख्य सचिव के निर्देश के आलोक में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने सभी उपायुक्तों, नगर आयुक्तों, कार्यपालक पदाधिकारियों एवं शहरी निकायों को विस्तृत निर्देश जारी कर पेयजल व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त रखने को कहा है। विभाग की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि गर्मी के मौसम में नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना नगर निकायों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अमृत तथा राज्य योजना से दी जा रही पानी
प्रधान सचिव ने कहा है कि राज्य सरकार प्रत्येक व्यक्ति तक स्वच्छ एवं पीने योग्य पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। अमृत, अमृत 2.0 तथा राज्य योजना के तहत विभिन्न शहरों और नगर क्षेत्रों में पाइपलाइन आधारित जलापूर्ति योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा जरूरत वाले क्षेत्रों में चापाकल, टैंकर एवं अन्य वैकल्पिक माध्यमों से भी जलापूर्ति की व्यवस्था की जा रही है।

नियमित जलापूर्ति करें
पत्र में निर्देश दिया गया है कि जिन क्षेत्रों में नलों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है, वहां शत-प्रतिशत क्षमता के साथ नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। किसी भी स्थिति में जलापूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। जलमीनार, मोटर, पाइपलाइन अथवा अन्य तकनीकी कारणों से आपूर्ति प्रभावित होने पर तत्काल मरम्मत कर व्यवस्था बहाल करने को कहा गया है।
इसके साथ ही जिन मोहल्लों एवं वार्डों में पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां स्थापित चापाकलों को पूरी तरह चालू हालत में रखने का निर्देश दिया गया है। खराब पड़े चापाकलों की तत्काल मरम्मत कराने तथा उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि लोगों को पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े।
विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि जहां नल या चापाकल के माध्यम से जलापूर्ति संभव नहीं हो पा रही है, वहां टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था करने तथा जल संकट वाले क्षेत्रों की लगातार मॉनिटरिंग करने का भी निर्देश दिया गया है।
जलापूर्ति संबंधित शिकायतों का त्वरित निपटारा का निर्देश
प्रधान सचिव ने सभी नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत एवं अधिसूचित क्षेत्र समितियों को जलापूर्ति संबंधी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए विशेष टीम गठित करने को कहा है। यह टीम पेयजल संकट, मोटर खराबी, पाइपलाइन लीकेज, चापाकल खराब होने जैसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
पत्र में यह भी कहा गया है कि साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल एवं बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना शहरी निकायों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 के तहत निकायों को कर, सेस एवं शुल्क वसूली का अधिकार प्राप्त है, इसलिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाना उनकी जिम्मेदारी है।
मुख्य सचिव ने भी दिया है निर्देश
गौरतलब है कि 6 मई 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य की शहरी जलापूर्ति व्यवस्था की गहन समीक्षा की गई थी। बैठक में गर्मी के दौरान किसी भी शहर या नगर क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न नहीं होने देने का निर्देश दिया गया था, जिसके बाद नगर विकास विभाग ने यह आदेश जारी किया है।

