
Ranchi : मधुकम अतिक्रमण मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने महादेव उरांव की अपील (एलपीए) खारिज कर दी। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अवमानना मामले में एकल पीठ के 31 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि महादेव उरांव ने एकल पीठ के समक्ष प्रतिवादियों से 1.08 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त करने की जानकारी नहीं दी थी। अदालत के मुताबिक, इस तथ्य को छिपाकर संबंधित जमीन पर कब्जा लेने के संबंध में आदेश प्राप्त किया गया।
अदालत ने यह भी कहा कि अवमानना मामले में एकल पीठ के आदेश को पहले सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन वहां से बिना किसी राहत के एसएलपी वापस ले ली गई। इसके बाद दोबारा झारखंड हाईकोर्ट में मामला दाखिल किया गया। खंडपीठ ने इसी आधार पर अपील को सुनवाई योग्य नहीं माना और उसे खारिज कर दिया।
महादेव उरांव की ओर से मामले में दलीलें दी गईं, जबकि प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता गौरव राज और श्रीकांत स्वरूप ने पक्ष रखा। बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हुई कड़ी टिप्पणी के बाद महादेव उरांव ने एसएलपी वापस ले ली थी।
इससे पहले 31 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति राजेश शंकर की एकल पीठ ने महादेव उरांव की अवमानना याचिका पर फैसला सुनाया था। कोर्ट ने पहले दिए गए उस आदेश को वापस ले लिया था, जिसमें अतिक्रमण हटाने के लिए सीओ को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।
एकल पीठ ने कहा था कि याचिकाकर्ता ने रिट याचिका में प्रतिवादियों की ओर से दी गई करीब एक करोड़ रुपये की राशि का उल्लेख नहीं किया। साथ ही संबंधित लोगों को रिट याचिका में प्रतिवादी भी नहीं बनाया गया। कोर्ट ने इसे न्यायालय को गुमराह करने और शपथ पत्र में गलत तथ्य देने का मामला माना था।
अदालत ने महादेव उरांव पर 12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। जुर्माने की राशि से 12 प्रभावित प्रतिवादियों को एक-एक लाख रुपये देने का निर्देश दिया गया था।
मामला खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 घरों से जुड़ा है। जिला प्रशासन की ओर से इन घरों को हटाने का आदेश दिया गया था और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था।
स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये के हिसाब से जमीन के लिए भुगतान किया था और वर्षों से वहां मकान बनाकर रह रहे हैं। उनका आरोप है कि करीब 38.25 डिसमिल जमीन के लिए कुल 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये का भुगतान किया गया, इसके बावजूद अब उन्हें बेदखली का सामना करना पड़ रहा है।

