
रांची : भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में सालों से धूल फांक रही फाइलों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि अब प्राथमिक जांच के नाम पर सालों तक मामलों को लटकाया नहीं जा सकता। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अगुवाई वाली खंडपीठ ने एसीबी चीफ को सख्त निर्देश दिया है कि जितने भी मामले पेंडिंग हैं, उनकी प्रारंभिक जांच (पीई) अगले 3 महीनों के भीतर हर हाल में पूरी की जाए।
कोर्ट ने जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सीमाएं भी तय कर दी हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी सामान्य स्थिति में प्रारंभिक जांच की सीमा ज्यादा से ज्यादा 6 महीने बढ़ाई जा सकती है। लेकिन, अगर एसीबी 6 महीने के बाद भी जांच आगे खींचना चाहती है, तो उसे इसके पीछे की ठोस वजह फाईलों में दर्ज करनी होगी। बिना वाजिब कारण बताए समय-सीमा बढ़ाना अब नामुमकिन होगा।
कई अफसर और कर्मचारी बिना किसी फैसले के ही हो गए रिटायर
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि राज्य में प्रशासनिक ढिलाई का आलम यह है कि साल 2013 और 2022 से कई मामले ठंडे बस्ते में पड़े हैं। लगभग 11-11 सालों से जांच पूरी न होने की वजह से कई अफसर और कर्मचारी बिना किसी फैसले के ही रिटायर हो चुके हैं। वे बिना साबित हुए दोष के भी मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
अदालत ने इस जनहित याचिका (पीआईएल) को निबटाते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो को निर्देश दिया है कि वह 6 महीने बाद अपनी पूरी प्रगति रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करे। हाईकोर्ट के इस सख्त फैसले से जहां लटकी जांचों में तेजी आने की उम्मीद है, वहीं बेवजह परेशानी झेल रहे लोगों को राहत मिलने के आसार जगे हैं।
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