रांची। झारखंड सरकार ने झारखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को प्रदान की जाने वाली अनुसेवक भत्ता, अनुसचिवीय सहायता की राशि व अन्य सुविधाओं में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने संकल्प जारी कर नई व्यवस्था लागू कर दी है। वित्त विभाग की सहमति के बाद जारी इस संकल्प का लाभ राज्य में निवास कर रहे झारखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीश को मिलेगा।
घरेलू नौकर और चालक भत्ता
सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों को घरेलू सहायता के लिए प्रतिमाह 50 हजार रुपये तथा सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को 45 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त मोबाइल, ब्रॉडबैंड, इंटरनेट, हाउसकीपिंग और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए 15 हजार रुपये प्रतिमाह अलग से उपलब्ध कराए जाएंगे। इस प्रकार सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों को कुल 65 हजार रुपये और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को कुल 60 हजार रुपये प्रतिमाह की सुविधा प्राप्त होगी।
अब तक सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों को कुल 50 हजार रुपये तथा सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को 45 हजार रुपये प्रतिमाह की सुविधा मिलती थी। नई व्यवस्था में दोनों श्रेणियों के लिए 15-15 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि अन्य सेवाओं के मद में स्वीकृत की गई है। सरकार का कहना है कि बढ़ती आवश्यकताओं और संचार सेवाओं पर होने वाले खर्च को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
संकल्प में यह भी प्रावधान किया गया है कि यह सुविधा केवल उन सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को मिलेगी जो झारखंड उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त हुए हैं और राज्य की सीमा के भीतर निवास कर रहे हैं। यदि पति-पत्नी दोनों ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं तो यह सुविधा केवल एक को ही देय होगी। घरेलू सहायता के लिए स्थाई कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति भी की जा सकेगी।
सरकार के इस निर्णय को न्यायपालिका से जुड़े सेवानिवृत्त पदाधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे उन्हें घरेलू सहायता के साथ-साथ संचार और अन्य आवश्यक सेवाओं के बेहतर प्रबंधन में सहूलियत मिलेगी। विभागीय संकल्प जारी होने के साथ ही यह व्यवस्था प्रभावी हो गई है।

