
रांची : झारखंड में मानसून पूरी तरह से सक्रिय है और राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा का दौर लगातार जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), रांची के अनुसार 2 जुलाई से 6 जुलाई 2025 तक झारखंड के कई जिलों में भारी वर्षा की संभावना है। इसको लेकर मौसम केंद्र ने येलो अलर्ट जारी किया है। नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसके चलते डैम के फाटक खोलने की नौबत आ गई है। वहीं कई स्थानों पर पुलों और सड़कों को नुकसान पहुंचा है।
Jharkhand Ka Mausam : किन-किन जिलों में जारी किया गया है येलो अलर्ट
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 2 जुलाई को पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, और हजारीबाग में भारी बारिश और वज्रपात की संभावना है। 3 जुलाई को इन जिलों के साथ रामगढ़ भी प्रभावित रहेगा। 4 जुलाई को देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज के लिए अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 5 जुलाई को राज्य के लगभग सभी पूर्वोक्त जिले फिर से भारी वर्षा की चपेट में रहेंगे। 6 जुलाई को भी पलामू, चतरा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, हजारीबाग और रामगढ़ में बारिश जारी रहने की संभावना है।
Jharkhand Ka Mausam : राज्य में अब तक का वर्षापात – जिलावार स्थिति
1 जून से 1 जुलाई 2025 के बीच झारखंड के कुछ जिलों में सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। देवघर, गोड्डा और पाकुड़ में 20 से 59 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके विपरीत दुमका और जामताड़ा जैसे जिलों में औसत से अधिक, यानी 20 से 59 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। गढ़वा, कोडरमा, गिरिडीह और साहिबगंज में वर्षा सामान्य रही है। वहीं, राज्य के अधिकतर जिले जैसे पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, रांची, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, लोहरदगा, लातेहार, हजारीबाग, चतरा और पलामू में सामान्य से 60 प्रतिशत से अधिक वर्षा हुई है। विशेष रूप से पलामू में इस बार अच्छी वर्षा दर्ज की गई है, जो आमतौर पर सूखा प्रभावित रहता है।
भारी बारिश का हरी सब्जियों पर गंभीर असर
लगातार हो रही भारी बारिश का सीधा असर राज्य की कृषि और सब्जी उत्पादन पर पड़ा है। खेतों में जलभराव के कारण हरी सब्जियों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। इस वजह से सब्जियों की कीमतों में भारी वृद्धि देखी जा रही है। बाजार में नेनुआ और भिंडी जैसी हरी सब्जियों की कीमत ₹80 से ₹100 प्रति किलो तक पहुंच गई है। इससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के भोजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, क्योंकि अब उनकी थाली से हरी सब्जियां लगभग गायब होती जा रही हैं।

